सऊदी अरब ने चीन के साथ आर्थिक और निवेश साझेदारी को अहम बताया
सऊदी अरब के उप निवेश मंत्री इब्राहिम मुबारक ने कहा कि 2026 चीन अंतरराष्ट्रीय निवेश और व्यापार मेले में सऊदी अरब की विशिष्ट भागीदारी दोनों देशों के गहरे संबंधों और भविष्य की संभावनाओं को दर्शाती है।
मुख्य बिंदु
AIसऊदी अरब के उप निवेश मंत्री इब्राहिम मुबारक ने कहा कि 2026 चीन अंतरराष्ट्रीय निवेश और व्यापार मेले में सऊदी अरब की विशिष्ट भागीदारी दोनों देशों के गहरे संबंधों और भविष्य की संभावनाओं को दर्शाती है।
मुबारक ने मेले में सऊदी अरब की ओर से बोलते हुए निवेश मंत्री फहद बिन अब्दुलजलील अल सैफ की ओर से किंग सलमान और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की शुभकामनाएँ चीन की सरकार और जनता को दीं और उनके लिए प्रगति और समृद्धि की कामना की।
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब चीन में निवेश उपस्थिति बढ़ाने और दोनों देशों के बीच आर्थिक और निवेश सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें नई औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित करना, आपूर्ति शृंखलाओं को विविध और लचीला बनाना, नई तकनीकों और क्षमताओं का स्थानीयकरण और सऊदी अरब से वैश्विक बाजारों तक विस्तार शामिल है।
उप निवेश मंत्री ने बताया कि दोनों देशों के नेतृत्व के समर्थन से सऊदी अरब और चीन के संबंध एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल गए हैं। सऊदी विजन 2030 और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के मेल से यह साझेदारी और मजबूत हुई है। चीन सऊदी अरब का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि सऊदी अरब मध्य पूर्व में चीन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
इब्राहिम मुबारक ने बताया कि 2025 में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 115 अरब डॉलर तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि ये आँकड़े भविष्य की महत्वाकांक्षाओं के मुकाबले कम हैं, क्योंकि आगे का दौर निवेश को गहरा करने, औद्योगिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने और दोनों देशों के लिए अधिक आर्थिक मूल्य सृजित करने का है।
उन्होंने कहा, "सऊदी अरब इस साल विजन 2030 की तीसरी और अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है। बुनियादी ढाँचा तैयार करने, सुधार लागू करने और तेज़ी से क्रियान्वयन के बाद अब देश आर्थिक प्रभाव को अधिकतम करने, अवसरों के विस्तार और निवेश व निजी क्षेत्र की भूमिका को गहरा करने की ओर बढ़ रहा है। 2025 में गैर-तेल गतिविधियों का योगदान सकल घरेलू उत्पाद में 55% तक पहुँच गया, जो अर्थव्यवस्था के विस्तार और निवेशकों के लिए अवसरों का संकेत है।"
मुबारक ने आगे कहा, "हमारे लिए निवेश का आकार ही नहीं, बल्कि उसका विस्तार और विविधता भी ज़रूरी है, ताकि नए क्षेत्रों और अवसरों में गहरी साझेदारियाँ बनें, संयुक्त निवेश, क्षमताओं का स्थानीयकरण, ज्ञान और तकनीक का आदान-प्रदान और अधिक एकीकृत मूल्य शृंखलाएँ तैयार हों। हम चीन में सऊदी निवेश की और अधिक उपस्थिति की उम्मीद करते हैं, जैसा कि ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स और अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में अग्रणी सऊदी कंपनियाँ पहले ही कर चुकी हैं।"
उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच साझेदारी लगातार बढ़ रही है। 2025 में सऊदी अरब में चीनी निवेश का आकार लगभग 40 अरब रियाल रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 27% अधिक है। सऊदी अरब में 1,900 से अधिक चीनी कंपनियाँ काम कर रही हैं, जिनमें से 43 ने सऊदी अरब को अपना क्षेत्रीय मुख्यालय बनाया है। दोनों देशों के बीच उन्नत उद्योग, ऊर्जा, तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, लॉजिस्टिक्स, आपूर्ति शृंखला और डिजिटल अर्थव्यवस्था में व्यापक अवसर मौजूद हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों की साझेदारी केवल अर्थव्यवस्था और निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंध भी लगातार बढ़ रहे हैं। सऊदी अरब ने स्कूलों में चीनी भाषा की पढ़ाई शुरू की है, क्योंकि भाषा को संवाद का माध्यम ही नहीं, बल्कि संस्कृतियों को जोड़ने और गहरी व टिकाऊ साझेदारी बनाने का जरिया माना जाता है।
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