अरामको प्रमुख: होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होना अब तक की सबसे बड़ी तेल आपूर्ति संकट
अरामको के प्रमुख अमीन नासिर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना इतिहास की सबसे बड़ी तेल आपूर्ति की चुनौती है, जिसका असर वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ा है।
मुख्य बिंदु
AIअरामको के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंजीनियर अमीन बिन हसन नासिर ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से दुनिया को इतिहास की सबसे बड़ी तेल आपूर्ति की चुनौती का सामना करना पड़ा है। उन्होंने बताया कि इस संकट का असर केवल वैश्विक तेल आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक खाद्य सुरक्षा तक भी पहुंचता है।
नासिर ने जोर देकर कहा कि अरामको ने अपनी परिचालन संरचना और आपूर्ति मार्गों को बदलकर इस संकट का सामना किया है। कंपनी के पास खाड़ी और लाल सागर के अलावा भी कई निर्यात विकल्प मौजूद हैं।
अरामको प्रमुख ने 'अल अरबिया' को दिए बयान में कहा कि कंपनी ने दूसरी तिमाही में मजबूत परिचालन प्रदर्शन जारी रखा, जिसका श्रेय उसकी उच्च तैयारियों और टीमों की दक्षता को जाता है। इसका सीधा असर कंपनी के वित्तीय परिणामों पर पड़ा, भले ही वैश्विक ऊर्जा बाजारों में असाधारण चुनौतियां रहीं।
नासिर ने 'अल अरबिया बिजनेस' को दिए इंटरव्यू में, कंपनी के तिमाही नतीजों की घोषणा के बाद, कहा कि क्षेत्र में हालिया भू-राजनीतिक घटनाओं का तेल बाजारों पर बड़ा असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से "इतिहास की सबसे बड़ी तेल आपूर्ति की चुनौती" पैदा हुई, जिससे संकट की शुरुआत से अब तक वैश्विक बाजारों को 2.66 अरब बैरल से ज्यादा की आपूर्ति का नुकसान हुआ।
अमीन नासिर ने स्पष्ट किया कि अरामको ने इस संकट के असर को सीमित करने में अहम भूमिका निभाई है। कंपनी ने अपनी परिचालन लचीलापन, रणनीतिक योजना और आपातकालीन तैयारियों के साथ उत्पादन और वितरण प्रबंधन में दक्षता दिखाई।
अरामको प्रमुख ने बताया कि कंपनी ने अपनी एकीकृत परिचालन संरचना का लाभ उठाकर आपूर्ति मार्गों को बदला और स्थानीय व वैश्विक ग्राहकों की जरूरतें पूरी कीं। अरामको ने यनबू बंदरगाह के जरिए रोजाना करीब 5 मिलियन बैरल तेल निर्यात किया, साथ ही पश्चिमी क्षेत्र की रिफाइनरियों को लगभग 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति की।
नासिर ने बताया कि दूसरी तिमाही में रिफाइनिंग मार्जिन 130% से अधिक बढ़ा। चुनौतियों और बिक्री में गिरावट के बावजूद, गैर-परिचालन मदों को छोड़कर कंपनी का शुद्ध लाभ दूसरी तिमाही में लगभग 125 अरब सऊदी रियाल रहा, जो पिछले साल की दूसरी तिमाही की तुलना में 30% से अधिक की वृद्धि है।
उन्होंने बताया कि अरामको ने लगभग 82 अरब सऊदी रियाल की तिमाही लाभांश की घोषणा की है, जो सालाना आधार पर 3.5% की वृद्धि है। यह कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति और शेयरधारकों को स्थायी व बढ़ते लाभांश देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
नासिर ने कहा कि यदि संकट मौजूदा गति से जारी रहा तो इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि अरामको के पास कई विकल्प और समाधान हैं, जिससे उसकी उत्पादों की वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनी रहेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह धारणा गलत है कि कंपनी का निर्यात केवल दो मुख्य मार्गों — खाड़ी और लाल सागर — पर निर्भर है। अरामको के पास स्वेज नहर और सुमैद पाइपलाइन के जरिए भूमध्य सागर तक निर्यात की क्षमता है, साथ ही जापान, दक्षिण कोरिया, मिस्र और नीदरलैंड में अपनी रणनीतिक भंडारण सुविधाओं का लाभ भी उठाती है।
नासिर ने बताया कि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन में दीर्घकालिक निवेश के चलते कंपनी अब पश्चिमी तट की अपनी सुविधाओं तक रोजाना 7 मिलियन बैरल तक तेल भेज सकती है, जिससे बाब अल-मंदब या स्वेज नहर के रास्ते भूमध्य सागर तक निर्यात में बड़ी लचीलापन मिलती है।
