अमेरिका-चीन के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की खाई अब सबसे कम
अमेरिका और चीन के एआई मॉडल्स की गुणवत्ता में अंतर तेजी से घट रहा है, जिससे वॉशिंगटन की तकनीकी बढ़त पर नए सवाल उठे हैं।
मुख्य बिंदु
AIअमेरिका और चीन के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल्स के प्रदर्शन में अंतर तेजी से घट रहा है। बीते महीनों में चीनी कंपनियों की बड़ी प्रगति के चलते यह फासला कम हुआ है, जिससे वॉशिंगटन की तकनीकी बढ़त बनाए रखने की क्षमता पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
'ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस' के विश्लेषण के अनुसार, अब चीन के सर्वश्रेष्ठ एआई मॉडल्स अमेरिकी मॉडल्स से सिर्फ 3% पीछे हैं। यह प्रगति 'डीपसीक' कंपनी के 'वी 4.1 फ्लैश' मॉडल के सितंबर में लॉन्च होने के बाद दर्ज की गई है।
यह अंतर मई में 9% और साल की शुरुआत में 15% था। 'ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस' के वरिष्ठ विश्लेषक रॉबर्ट लिया के मुताबिक, इस तेजी से चीनी कंपनियों की वैश्विक एआई बाजार में हिस्सेदारी बढ़ सकती है।
चीन ने वॉशिंगटन से फासला घटाया
लिया का मानना है कि चीन की यह तरक्की एआई विकास में अनुभव के साथ-साथ स्थानीय चिप्स और कंपोनेंट्स पर बेहतर मॉडल्स तैयार करने की क्षमता का नतीजा है।
इस प्रगति ने अमेरिका द्वारा चीन पर लगाए गए तकनीकी निर्यात प्रतिबंधों की प्रभावशीलता पर बहस फिर छेड़ दी है, खासकर 'एनविडिया' चिप्स पर। इनका मकसद बीजिंग की एआई क्षमताओं को सीमित करना है, जबकि 'हुआवेई' जैसी कंपनियां स्थानीय विकल्प विकसित कर रही हैं।
लिया ने कहा कि हालिया घटनाक्रम 'एआई में अमेरिकी तकनीकी बढ़त की दीर्घकालिक स्थिरता पर और भी संदेह' पैदा करते हैं।
अमेरिका और चीन एआई तकनीक में बढ़त के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, क्योंकि यह आर्थिक उत्पादकता, सैन्य क्षमता और वैश्विक प्रभाव का अहम साधन बन चुकी है।
चीन की तेज प्रगति का संकेत यह है कि 'डीपसीक' का 'वी 4.1 फ्लैश' मॉडल पिछले महीने 'लाइव बेंच' मंच पर दुनिया में छठे स्थान पर रहा। यह 2025 में 'आर 1' मॉडल की उल्लेखनीय सफलता के बाद किसी चीनी मॉडल की सबसे ऊंची रैंकिंग है।
'लाइव बेंच' एआई मॉडल्स का मूल्यांकन उनकी सवालों, पहेलियों और विभिन्न कार्यों को हल करने की क्षमता के आधार पर करता है, जो मानव आईक्यू टेस्ट जैसा है।
'डीपसीक' के मॉडल ने 81.1 अंक हासिल किए, जबकि 'एंथ्रोपिक' के सर्वश्रेष्ठ मॉडल को 83.4 अंक मिले। लिया के अनुसार, यह चीनी मॉडल अब 'एंथ्रोपिक' और 'ओपनएआई' के उन्नत सिस्टम्स के बराबर प्रदर्शन कर रहा है।
हालांकि प्रदर्शन में अंतर अब सिर्फ 3% है, अमेरिकी मॉडल्स की रैंकिंग अब भी मजबूत है — 'लाइव बेंच' की शीर्ष 15 सूची में सिर्फ तीन चीनी मॉडल्स हैं।
चीनी कंपनियों के सामने चुनौतियां
प्रदर्शन में सुधार का मतलब यह नहीं कि व्यावसायिक सफलता भी तुरंत मिलेगी। 'ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस' के विश्लेषकों के मुताबिक, चीनी कंपनियों को नियामकीय और कारोबारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें अमेरिकी जांच और संभावित प्रतिबंध शामिल हैं, खासकर मॉडल डिस्टिलेशन तकनीक को लेकर।
लाभप्रदता भी चीनी एआई सेक्टर की बड़ी कमजोरी है। लिया का अनुमान है कि यह क्षेत्र 2030 तक लाभ में नहीं आ पाएगा।
इसकी वजह है कि कंपनियां भारी मात्रा में कोड कम कीमत पर उपलब्ध करा रही हैं, जबकि घरेलू बाजार में 1100 से ज्यादा बड़े भाषा मॉडल्स के बीच कीमतों की जंग जारी है।
'बाइटडांस' की 'डूबाओ' सेवा चीन में एआई एप्लिकेशन से सबसे ज्यादा राजस्व कमा रही है, जबकि 'डीपसीक' और 'टेनसेंट' की चैट सेवाएं अब भी मुफ्त हैं, जिससे मूल्य प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है।
लिया का मानना है कि चीनी एआई सेक्टर को टिकाऊ लाभ के लिए प्रतिस्पर्धा कम करनी होगी, कंपनियों का पुनर्गठन करना होगा और ज्यादा व्यावहारिक मूल्य निर्धारण अपनाना होगा।
