आपातकालीन नकदी की वजह से यूरोपीय संघ में नोटों का चलन बढ़ा
नई रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्टफोन से भुगतान बढ़ने के बावजूद यूरोपीय संघ में नकद नोटों का चलन लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि लोग आपात स्थिति के लिए नकदी रखना पसंद कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु
AIनई आंकड़ों से पता चला है कि यूरोपीय संघ में चलन में मौजूद नकद नोटों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि स्मार्टफोन से भुगतान का चलन भी तेजी से फैल रहा है। इसकी मुख्य वजह जंगलों में लगी आग जैसी आपात स्थितियों के चलते 'आपातकालीन नकदी' रखने की बढ़ती प्रवृत्ति है।
ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' के मुताबिक, यूरोपीय सेंट्रल बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री फिलिप लेन ने कहा है कि रोजमर्रा के लेनदेन में नकद का इस्तेमाल घट रहा है, लेकिन चलन में मौजूद नोटों की मात्रा बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुझान युद्धों और साइबर हमलों की आशंका के कारण है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली बाधित हो सकती है।
पिछले साल यूनाइटेड किंगडम की कंपनी मार्क्स एंड स्पेंसर पर बड़ा साइबर हमला हुआ था, जिससे उसकी ऑनलाइन ऑर्डरिंग हफ्तों तक बाधित रही। 2025 में यूरोपीय संघ के निवासियों को सलाह दी गई थी कि वे जंगल की आग, बाढ़, तूफान या साइबर हमलों जैसी आपात स्थितियों के लिए 72 घंटे की जरूरत का सामान, जिसमें नकद भी शामिल है, अपने पास रखें।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक के आंकड़ों के अनुसार, चलन में मौजूद नकद नोटों का मूल्य 2016 में लगभग एक ट्रिलियन यूरो से बढ़कर जून 2026 में 1.6 ट्रिलियन यूरो हो गया। नोटों की संख्या 2019 में 24 मिलियन से बढ़कर 31 मिलियन हो गई। 2025 में 50 यूरो के नोट सबसे ज्यादा चलन में थे, इसके बाद 100 यूरो के नोटों का स्थान रहा।
जर्मनी, ऑस्ट्रिया, फिनलैंड, स्वीडन और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देश परिवारों को आपात स्थिति के लिए 70 से 100 यूरो नकद रखने की सलाह देते हैं।
