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अर्थजगत

अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव और प्रतिबंध बढ़ाए

अमेरिका ने ईरान की वित्तीय धाराओं को रोकने और क्षेत्रीय नौवहन पर हमले रुकवाने के लिए आर्थिक दबाव और प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया है।

अजेल हिंदी45 दिन पहले · 6 मिनट का पठन
ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़ी प्रेस वार्ता

मुख्य बिंदु

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अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए उसके वित्तीय स्रोतों को सूखाने और क्षेत्र में नौवहन पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए नए प्रतिबंध लगाए हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब इस संघर्ष के असर से वैश्विक ऊर्जा और व्यापार बाजारों में अस्थिरता बढ़ रही है।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 60 व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए हैं, हालांकि इस सूची में उन चीनी वित्तीय संस्थानों का नाम नहीं है जिन पर ईरानी तेल व्यापार में मदद करने का संदेह है। नए कदमों में चीन, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर और अन्य देशों की कंपनियां और फ्रांस की एक खाद्य तेल रिफाइनरी भी शामिल हैं।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को ईरान पर लगाए गए द्वितीयक प्रतिबंधों के विस्तार की घोषणा की और इसे 'आर्थिक विजय दिवस' बताया। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन उन वित्तीय नेटवर्क्स को निशाना बना रहा है जो तेहरान को प्रतिबंधों से बचने और आय बनाए रखने में मदद करते हैं।

बेसेंट ने कहा कि अमेरिका 'दुनिया भर में ईरान के वित्तीय संबंधों पर आर्थिक हमला' कर रहा है। उनका लक्ष्य ईरानी सरकार को समर्थन देने वाली हर आर्थिक धारा को काटना और तेहरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना है।

अमेरिकी वित्त मंत्री ने यह नहीं बताया कि नए प्रतिबंध किन देशों पर लागू होंगे या कब से प्रभावी होंगे, लेकिन उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि ईरान से व्यापार करने वाले देश और कंपनियां डॉलर आधारित वित्तीय प्रणाली से बाहर हो सकती हैं।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान से जुड़े 1,000 से अधिक व्यक्तियों, जहाजों और विमानों पर प्रतिबंध लगाए हैं।

वॉशिंगटन का निशाना: ईरानी अर्थव्यवस्था की धमनियाँ

ये नए कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार की ओर से ईरान पर दबाव बढ़ाने की कोशिशों के तहत उठाए गए हैं। यह ऐसे समय में हुआ है जब फरवरी में अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों के बाद से खाड़ी और लाल सागर में जहाजों पर हमले जारी हैं।

वॉशिंगटन का मानना है कि प्रतिबंधों को कड़ा करना तेहरान पर दबाव डालने का एक तरीका हो सकता है ताकि वह नौवहन पर हमले रोके, जबकि ईरान चेतावनी देता है कि आर्थिक दबाव उल्टा असर डाल सकता है।

ईरान दशकों से अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के साए में है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है, लेकिन अब तक उसकी नेतृत्व शैली में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।

करीब छह महीने पहले अमेरिकी और इजरायली हमलों की शुरुआत के बाद से संघर्ष का असर शिपिंग और ऊर्जा बाजारों पर पड़ा है। क्षेत्र में नौवहन बाधित हुआ है और तेल प्रवाह सीमित हुआ है, जिससे अमेरिकी और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है।

तेल बाजारों में सोमवार को दो हफ्ते की तेजी के बाद कीमतों में गिरावट आई, क्योंकि निवेशक अमेरिकी प्रतिबंधों की घोषणा से पहले मुनाफा वसूलने लगे।

'कोई भी' प्रतिबंधों से बाहर नहीं

वॉशिंगटन खासतौर पर उन नेटवर्क्स पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जिनके जरिए ईरान तेल की तस्करी और प्रतिबंधों से बचाव करता है। बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने उन नेटवर्क्स, बिचौलियों और वित्तीय चैनलों की पहचान की है जिन पर तेहरान अपनी आय के लिए निर्भर है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने साझेदारों के साथ मिलकर ईरान की 'अवैध' आय के स्रोतों को निशाना बनाएगा।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, ईरानी सरकार अपनी अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए पांच मुख्य क्षेत्रों—डिजिटल संपत्ति, तकनीक, सोना, विमानन और शिपिंग—पर निर्भर है, जो अब प्रतिबंधों के दायरे में आ गए हैं।

मंत्रालय ने नई मुहिम के तहत लगभग 60 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिए हैं, ताकि ईरान के वित्तीय स्रोतों को और सीमित किया जा सके।

ईरान से व्यापारिक संबंध रखने वाले देशों को संदेश देते हुए बेसेंट ने, खासकर चीनी बैंकों के संदर्भ में, कहा कि 'कोई भी अमेरिकी प्रतिबंधों से बाहर नहीं है'।

अमेरिकी रणनीति के केंद्र में चीन

चीन, जो कई वर्षों से ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, वॉशिंगटन की नई रणनीति में सबसे संवेदनशील बिंदुओं में से एक है।

बेसेंट पहले ही बीजिंग से अमेरिका के साथ सहयोग की अपील कर चुके हैं। जुलाई के मध्य में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी घेराबंदी के बाद चीन को ईरानी तेल की आपूर्ति में गिरावट आई है।

हालांकि, चीनी बैंकों पर प्रतिबंध कड़े करने से वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच एक नई आर्थिक जंग छिड़ सकती है, जबकि अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वार्ता की संभावना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर चीन की बैंकों को निशाना बनाया गया तो बीजिंग जवाबी कार्रवाई कर सकता है, खासकर जब अमेरिका ने उसकी महत्वपूर्ण धातुओं के निर्यात पर भी सख्ती की है।

चीनी विदेश मंत्रालय ने प्रतिबंधों और दबाव की नीति को खारिज करते हुए कहा है कि ऐसे उपाय समस्याओं के समाधान में मदद नहीं करते और बीजिंग अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा।

ट्रंप ने दी टैरिफ लगाने की चेतावनी

अमेरिकी दबाव सिर्फ वित्तीय प्रतिबंधों तक सीमित नहीं है। ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों—जैसे तुर्की, इराक और भारत—की वस्तुओं पर टैरिफ लगाने की भी धमकी दी है।

यह धमकी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे टैरिफ के कानूनी आधार को रद्द कर दिया है।

दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी धमकियों को खारिज करते हुए क्षेत्र में नौवहन को लेकर अपनी चेतावनियां बढ़ा दी हैं। उसने जहाजों से कहा है कि वे बिना उसकी अनुमति के होर्मुज जलडमरूमध्य से न गुजरें।

ईरान ने 45 जहाजों की एक सूची भी जारी की है, जिन पर उसके नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है, और चेतावनी दी है कि किसी भी जहाज से जहाज पर माल स्थानांतरण की स्थिति में वह जवाबी कार्रवाई करेगा।

इन कदमों से क्षेत्र के सबसे अहम ऊर्जा और नौवहन मार्गों में जोखिम और बढ़ गया है, जबकि संघर्ष के चलते शिपिंग और तेल प्रवाह पर दबाव बना हुआ है।

पाकिस्तान ने वार्ता की पहल की

आर्थिक दबाव के बीच पाकिस्तान ने तेहरान की ओर कूटनीतिक पहल की है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर सोमवार को वार्ता के लिए ईरान पहुंचे।

पाकिस्तान ने कहा कि इस यात्रा का मकसद क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना है, जबकि पाकिस्तानी सूत्रों के अनुसार मुनीर ईरान के सर्वोच्च नेता के करीबी लोगों से मिलेंगे।

पाकिस्तानी सूत्रों ने बताया कि पिछले हफ्ते ट्रंप ने मुनीर से फोन पर बात की थी और मुख्य मांग ईरान को वार्ता की मेज पर लाना थी।

व्हाइट हाउस ने इस बातचीत की पुष्टि की है, लेकिन इसकी विस्तृत जानकारी नहीं दी।

ये पहल ऐसे समय हो रही है जब अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच हवाई हमलों का सिलसिला कुछ हफ्तों से थमा है, जबकि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संघर्ष खत्म करने को लेकर आखिरी सीधी वार्ता जून में हुई थी।

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