अमेरिकी विशेषज्ञ: ईरान पर समुद्री घेराबंदी से आर्थिक दबाव बढ़ेगा
अमेरिकी मामलों के विशेषज्ञ डॉ. अकील अब्बास ने कहा कि ईरान पर अमेरिकी समुद्री घेराबंदी पड़ोसी देशों के सहयोग पर निर्भर करेगी।
मुख्य बिंदु
AIअमेरिकी मामलों के विशेषज्ञ डॉ. अकील अब्बास ने कहा कि "ईरान पर अमेरिकी समुद्री घेराबंदी पड़ोसी देशों (तुर्की, इराक, तुर्कमेनिस्तान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, अज़रबैजान) पर दबाव डालने और उनके सहयोग पर निर्भर करेगी।"
उन्होंने 'अरबिया एफएम' से कहा, "इन देशों में से कुछ, जैसे तुर्की और अज़रबैजान, को घेराबंदी में शामिल होने के लिए राज़ी किया जा सकता है, जबकि इराक और पाकिस्तान पर दबाव डाला जा सकता है। यदि यह घेराबंदी सफल होती है, तो ईरान में वार्ता की वापसी की मांग करने वालों की सोच को समर्थन मिल सकता है, क्योंकि वे मौजूदा समुद्री घेराबंदी के परिणामों से डरते हैं।"
डॉ. अकील ने आगे कहा, "पूरी तरह से घेराबंदी लागू करना असंभव लगता है, लेकिन अगर ये देश हस्तक्षेप करते हैं तो बड़ा फर्क पड़ सकता है।" उन्होंने यह भी बताया कि ईरान के भीतर दो गुट हैं—एक, जो ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में युद्ध का पक्षधर है, और दूसरा, जो घेराबंदी के परिणामों से बचने के लिए वार्ता चाहता है।
उन्होंने कहा कि "समुद्री घेराबंदी की समस्या समय से जुड़ी है, क्योंकि अमेरिका इसके आर्थिक प्रभाव को दोगुना करने और ईरान के भीतर रास्तों को काटने के लिए तेज़ी से कार्रवाई करना चाहता है।"
ब्रिटिश अखबार टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इज़राइल ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए समुद्री घेराबंदी लगाने पर विचार कर रहे हैं।
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