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जीवनशैली

फ्रेंच फ्राइज़ में कम तेल के लिए नई माइक्रोवेव तकनीक

अमेरिकी शोधकर्ताओं ने माइक्रोवेव ऊर्जा से ऐसी फ्रेंच फ्राइज़ बनाई हैं जो कम तेल सोखती हैं, स्वाद और कुरकुरेपन पर असर नहीं पड़ता।

अजेल हिंदी1 घंटे पहले · 1 मिनट का पठन
फ्रेंच फ्राइज़ और माइक्रोवेव तकनीक का प्रयोग

मुख्य बिंदु

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अमेरिका की इलिनॉय यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने माइक्रोवेव ऊर्जा का उपयोग कर ऐसी फ्रेंच फ्राइज़ बनाने के लिए परीक्षण किए हैं, जो कम तेल सोखती हैं और इसका स्वाद या बनावट प्रभावित नहीं होता।

अध्ययन के मुताबिक, पारंपरिक तलने की प्रक्रिया में माइक्रोवेव ऊर्जा को जोड़ने से पकाने का समय घट सकता है और तेल का अवशोषण कम हो सकता है, जबकि कुरकुरेपन का स्तर भी बरकरार रहता है।

तेल से मिलने वाला स्वाद तली हुई चीज़ों में वसा कम करने को चुनौतीपूर्ण बनाता है, क्योंकि तलने की प्रक्रिया सिर्फ गर्म करने तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें कई जटिल भौतिक बदलाव भी होते हैं।

तलने के दौरान 90% समय में आलू के भीतर नकारात्मक दबाव बनता है, जिससे एक तरह का सक्शन इफेक्ट पैदा होता है और तेल का अवशोषण बढ़ जाता है।

माइक्रोवेव का काम आलू के अंदर मौजूद पानी को सीधे गर्म करना है, जिससे सतह से अंदर तक गर्मी पहुंचाने की बजाय ज्यादा भाप बनती है और आंतरिक दबाव बढ़ता है। इससे तेल के ऊतकों में प्रवेश की संभावना कम हो जाती है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह नई तकनीक स्वाद और बनावट को बरकरार रखते हुए कम वसा वाली फ्रेंच फ्राइज़ तैयार करने में मदद कर सकती है, साथ ही पकाने का समय घटाने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भी सहायक हो सकती है।

टीम ने यह भी बताया कि मौजूदा खाद्य फैक्ट्रियों में इस्तेमाल होने वाली फ्रायर मशीनों में माइक्रोवेव जनरेटर जोड़कर इस तकनीक को तकनीकी और आर्थिक रूप से बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है।

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