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जीवनशैली

रोज़ाना की यह आदत कमजोर कर सकती है याददाश्त

हालिया शोधों के अनुसार, स्मार्टफोन पर अत्यधिक निर्भरता 'डिजिटल भूलने' की वजह बन सकती है, जिससे दिमाग की बजाय डिवाइस पर जानकारी संचित होती है।

अजेल हिंदी1 घंटे पहले · 3 मिनट का पठन
स्मार्टफोन इस्तेमाल करते युवा, ध्यान भटकाव का संकेत

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AI

हाल ही में हुई कई शोधों ने चेतावनी दी है कि स्मार्टफोन पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता इंसान की याददाश्त के इस्तेमाल के तरीके को प्रभावित कर सकती है। इस स्थिति को 'डिजिटल भूलने' (Digital Amnesia) कहा जाता है, जिसमें लोग जानकारी याद रखने के बजाय उसे अपने डिवाइस में सुरक्षित रखते हैं। यह जानकारी ब्रिटिश अखबार 'द गार्जियन' के हवाले से सामने आई है।

आज स्मार्टफोन करोड़ों लोगों के लिए 'अतिरिक्त याददाश्त' बन गया है, जिसमें फोन नंबर, अपॉइंटमेंट, टू-डू लिस्ट और रोजमर्रा की जानकारियाँ सुरक्षित रहती हैं। इससे पहले की तरह चीजें याद रखने की जरूरत कम हो गई है।

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यह बदलाव जरूरी नहीं कि दिमागी क्षमताओं में गिरावट दर्शाता हो, बल्कि यह जानकारी के प्रबंधन के तरीके में बदलाव को दिखाता है। अब लोग डेटा को अपने दिमाग में रखने के बजाय डिवाइस के जरिए उसे दोबारा हासिल करते हैं।

वैज्ञानिक अध्ययनों में बताया गया है कि स्मार्टफोन स्थायी रूप से याददाश्त को कमजोर नहीं करते, लेकिन उन पर पूरी तरह निर्भर रहने से याद रखने और जानकारी दोहराने जैसी मानसिक क्षमताओं का अभ्यास कम हो जाता है। इन क्षमताओं को बनाए रखने के लिए नियमित अभ्यास जरूरी है।

2011 में साइंस पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन 'गूगल का याददाश्त पर प्रभाव' में कोलंबिया और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रतिभागी तब कम जानकारी याद रखते हैं, जब उन्हें लगता है कि वे बाद में इंटरनेट से उसे देख सकते हैं। हालांकि, वे यह बेहतर याद रखते हैं कि जानकारी कहाँ मिलेगी।

शोधकर्ताओं ने बताया कि याददाश्त के लिए बाहरी साधनों का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है, लेकिन स्मार्टफोन अलग हैं क्योंकि वे हमेशा साथ रहते हैं और निजी जानकारी का बड़ा भंडार रखते हैं। इस तरह वे इंसान के लिए 'अतिरिक्त याददाश्त' जैसे हो गए हैं।

नेविगेशन ऐप्स का स्थानिक याददाश्त पर असर

Scientific Reports में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 'गूगल मैप्स' जैसे डिजिटल नेविगेशन सिस्टम पर बार-बार निर्भर रहने से प्राकृतिक नेविगेशन की कुछ क्षमताओं का इस्तेमाल कम हो सकता है। जिन लोगों ने GPS पर ज्यादा भरोसा किया, वे केवल अपनी याददाश्त के सहारे रास्ता ढूँढने में कमजोर पाए गए।

इसी संदर्भ में, ब्रिटिश वैज्ञानिक एलियनोर मैग्वायर के लंदन के टैक्सी चालकों पर किए गए शोध में पाया गया कि नेविगेशन का गहन अभ्यास दिमाग के हिप्पोकैम्पस क्षेत्र में बदलाव लाता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दिमाग उन्हीं क्षमताओं के अनुसार बदलता है, जिनका बार-बार अभ्यास किया जाता है।

नोटिफिकेशन और ध्यान भटकने का खतरा

स्मार्टफोन का असर सिर्फ जानकारी स्टोर करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके इस्तेमाल के तरीके पर भी पड़ता है। लगातार नोटिफिकेशन और ऐप्स के बीच जल्दी-जल्दी स्विच करने से ध्यान भटकता है और दिमाग की फोकस करने की क्षमता प्रभावित होती है, जो स्थायी यादें बनाने के लिए जरूरी है।

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