बाहा की विरासत गाँवों में रंग-बिरंगी गर्मी, पर्यटकों की भीड़
बाहा क्षेत्र के विरासत गाँवों में गर्मी के मौसम में सांस्कृतिक और मनोरंजन कार्यक्रमों के चलते देश-विदेश से पर्यटक उमड़ पड़े।
मुख्य बिंदु
AIगर्मी के मौसम में बहा क्षेत्र के विरासत गाँव प्रमुख आयोजनों, त्योहारों और संग्रहालयों के केंद्र बन गए हैं, जिससे स्थानीय लोग और देश-विदेश के पर्यटक यहाँ की प्राचीन सभ्यताओं को जानने और अतीत की झलक पाने के लिए पहुँच रहे हैं।
बाहा में कई ऐतिहासिक और विरासत गाँव हैं, जो इसकी पहाड़ियों और तहामा क्षेत्र में फैले हैं—जैसे कि क़स्र बिन रक़ूश, क़िला बिन अलास, ऐतिहासिक ज़ी ऐन गाँव, अतावला, अलअबादला और अलमूसा गाँव। इन स्थलों का विकास कर इन्हें राष्ट्रीय पर्यटन का आकर्षण बनाया गया है, जिसमें कई व्यावहारिक परियोजनाएँ और नवाचार शामिल हैं।
विविध विरासत कार्यक्रम
इन गाँवों में सांस्कृतिक और कलात्मक गतिविधियाँ आयोजित होती हैं—जनप्रिय खेलों के प्रदर्शन, लोक नृत्य, सिलाई-कढ़ाई, पारंपरिक वस्त्र निर्माण, साथ ही कला कार्यशालाएँ, अरबी सुलेख और चित्रकला की कक्षाएँ, हस्तशिल्प और विरासत मॉडल के स्टॉल, पारंपरिक व्यंजन और शिल्पों के प्रदर्शन यहाँ देखने को मिलते हैं।
अतावला विरासत महोत्सव की मीडिया समिति के अध्यक्ष महदी अलकनानी ने बताया कि ये विरासत गाँव बहा क्षेत्र की पहचान और इतिहास को उजागर करते हैं, जिससे ये एक महत्वपूर्ण आर्थिक इंजन बन गए हैं और राष्ट्रीय विज़न के लक्ष्यों में योगदान दे रहे हैं। साथ ही, यहाँ आने वाले पर्यटक पुराने समय के सामाजिक जीवन, लोक कलाओं, परंपराओं और पारंपरिक पेशों से रूबरू होते हैं।
बढ़ती रुचि और सतत विकास
अतावला विरासत महोत्सव 10 दिन तक चलता है और इसमें हर उम्र के लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। यहाँ पर्यटक पूर्वजों की परंपराएँ—जैसे दुल्हन की बारात और मेहमाननवाज़ी की रस्में—देख सकते हैं, जो बहा के लोगों की उदारता दर्शाती हैं।
बाहा क्षेत्र की 72 से अधिक गाँवों और ऐतिहासिक स्थलों को संबंधित विभागों और स्थानीय लोगों की मदद से लगातार संरक्षित और पुनर्निर्मित किया जा रहा है, ताकि सांस्कृतिक पहचान बनी रहे और क्षेत्र को विश्वस्तरीय विरासत एवं सांस्कृतिक गंतव्य के रूप में स्थापित किया जा सके।
