‘मबरादा’: सऊदी क़हवा बनाने की पारंपरिक ठंडी करने वाली काष्ठ-आविष्कार
मबरादा, यानी क़हवा ठंडा करने की पारंपरिक लकड़ी की वस्तु, सऊदी क़हवा बनाने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती थी।
मुख्य बिंदु
AI‘मबरादा’ (क़हवा ठंडा करने का उपकरण) पुराने समय में सऊदी क़हवा बनाने की प्रक्रिया की एक प्रमुख पारंपरिक वस्तु थी। इसका इस्तेमाल आग पर भुने हुए कॉफी बीन्स को ठंडा करने और उन्हें पीसने से पहले छिलकों से अलग करने के लिए किया जाता था। यह उपकरण सऊदी मेहमाननवाज़ी और उदारता की संस्कृति का हिस्सा बन गया है।
मबरादा आमतौर पर स्थानीय लकड़ियों, खासकर एथल की लकड़ी से हाथ से बनाई जाती थी। इसका अंदरूनी हिस्सा खोखला होता था ताकि भुने हुए बीन्स को ठंडा किया जा सके, फिर उन्हें पीसने के लिए भेजा जाता था। इसकी बनावट, आकार और सजावट स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा और क्षेत्रीय विविधता को दर्शाती है।
रफ्हा प्रांत के कई बुजुर्गों के अनुसार, मबरादा लगभग हर घर में मौजूद रहती थी और भूनने के तुरंत बाद बीन्स को ठंडा करने के लिए इस्तेमाल होती थी। उनके मुताबिक, क़हवा बनाना एक पारिवारिक सामाजिक रस्म थी, जिसमें पारंपरिक मेहमाननवाज़ी की झलक मिलती थी।
नागरिक मोहम्मद अल-शम्मरी ने बताया कि मबरादा का इस्तेमाल सही समय पर बीन्स को ठंडा करने के लिए किया जाता था, ताकि उनकी गुणवत्ता बनी रहे। उन्होंने कहा कि यह उपकरण पारिवारिक बैठकों और रोज़ाना मेहमानों के स्वागत की यादों से जुड़ा है।
मटर अल-अनज़ी ने बताया कि मबरादा स्थानीय कारीगरों द्वारा क्षेत्रीय लकड़ियों से बनाई जाती थी और पीढ़ी दर पीढ़ी परिवारों में सहेजी जाती थी। उन्होंने कहा कि इसे संरक्षित रखना सऊदी क़हवा से जुड़ी सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने जैसा है।
मबरादा आज भी सऊदी क़हवा बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया और मेहमाननवाज़ी की संस्कृति की याद दिलाती है, और सामाजिक जीवन की स्मृतियों को संजोए हुए है।
