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ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञों ने दुर्लभ पुस्तकों पर एआई खतरे की चेतावनी दी

ऑस्ट्रेलिया में विशेषज्ञों और पुस्तक विक्रेताओं ने दुर्लभ पुस्तकों पर एआई के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता जताई और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए नियमों की मांग की।

अजेल हिंदी1 घंटे पहले · 1 मिनट का पठन
दुर्लभ पुस्तकों की दुकान में किताबें और विशेषज्ञ

मुख्य बिंदु

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ऑस्ट्रेलिया में दुर्लभ पुस्तकों के कई विशेषज्ञों और विक्रेताओं ने चेतावनी दी है कि पुरानी और दुर्लभ पुस्तकों की मांग बढ़ रही है, जिनका इस्तेमाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल विकसित करने में किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह चलन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए खतरा बन सकता है, जिन्हें दोबारा हासिल करना बेहद मुश्किल है।

मेलबर्न के एक बुकस्टोर मालिक और मेलबर्न रेयर बुक फेयर के प्रतिभागी टिम व्हाइट ने बताया कि किसी दुर्लभ पुस्तक का मूल्य सिर्फ उसकी सामग्री में नहीं, बल्कि उसके इतिहास, भौतिक स्वरूप और स्वामित्व के रिकॉर्ड में भी निहित होता है। उन्होंने चिंता जताई कि कुछ संस्थाएं दुर्लभ किताबों को खरीदकर उन्हें डिजिटल स्कैन करने और एआई सिस्टम को प्रशिक्षित करने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे कई बार ये किताबें नष्ट हो सकती हैं या हमेशा के लिए खो सकती हैं।

दुर्लभ पुस्तकों के व्यापारी जॉन सायन्सबरी ने बताया कि एआई तकनीक से जुड़ी संस्थाओं की ओर से पुरानी किताबों में रुचि बढ़ रही है। उन्होंने ऐतिहासिक महत्व की धरोहरों की सुरक्षा के लिए खरीदारों की पहचान की जांच को और सख्त करने की मांग की।

इसी संदर्भ में विशेषज्ञों ने यह भी माना कि एआई तकनीकें फहरिस्त बनाने, डिजिटल संरक्षण और दस्तावेजों के विश्लेषण जैसे कार्यों में अहम भूमिका निभा सकती हैं, लेकिन इनके इस्तेमाल के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाने चाहिए ताकि सांस्कृतिक विरासत की रक्षा हो सके और ऐतिहासिक महत्व की दुर्लभ वस्तुओं को नुकसान न पहुंचे।

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