बार्सिलोना ने अराजो की लिवरपूल लोन डील में 'डर की शर्त' नहीं जोड़ी
बार्सिलोना ने अपने डिफेंडर रोनाल्ड अराजो को लिवरपूल भेजते समय 'डर की शर्त' शामिल नहीं की, जिससे वह यूरोपीय मुकाबलों में बार्सिलोना के खिलाफ खेल सकेंगे।
मुख्य बिंदु
AIबार्सिलोना ने अपने उरुग्वेयन डिफेंडर रोनाल्ड अराजो को मौजूदा समर ट्रांसफर विंडो में लिवरपूल को लोन पर भेजते समय 'डर की शर्त' (फियर क्लॉज) शामिल नहीं की। इस शर्त के न होने से अराजो को 2026/2027 सीजन की चैंपियंस लीग में अगर लिवरपूल और बार्सिलोना आमने-सामने आते हैं, तो वह अपने पूर्व क्लब के खिलाफ खेल सकेंगे।
स्पेनिश अखबार 'स्पोर्ट' के मुताबिक, अराजो के लिवरपूल के साथ हुए करार में कोई ऐसी शर्त नहीं है जो उन्हें अपने पुराने क्लब के खिलाफ खेलने से रोके। ऐसे में अगर दोनों टीमें यूरोपीय प्रतियोगिता के ग्रुप स्टेज या नॉकआउट राउंड में आमने-सामने आती हैं, तो अराजो सामान्य रूप से मैदान में उतर सकते हैं।
अराजो ने बार्सिलोना से लोन पर जाने का फैसला इसलिए लिया ताकि उन्हें खेलने का ज्यादा मौका मिल सके और वे अपना फॉर्म वापस पा सकें, क्योंकि हाल के समय में बार्सिलोना के लिए उनकी भागीदारी काफी कम हो गई थी।
गौरतलब है कि 'डर की शर्त' आमतौर पर लोन डील्स में लगाई जाती है, ताकि लोन पर गए खिलाड़ी अपने मूल क्लब के खिलाफ न खेल सकें या फिर खेलने के लिए अतिरिक्त फीस देनी पड़े।
कई क्लबों को डर रहता है कि लोन पर भेजे गए खिलाड़ी मैच के नतीजे को प्रभावित कर सकते हैं, खासकर जब कुछ मामलों में ऐसे खिलाड़ियों पर नतीजों को प्रभावित करने के आरोप लगे हैं।
