मदीना मस्जिद के इमाम ने हरमों पर हौती हमले की निंदा की
मस्जिद-ए-नबवी के इमाम डॉ. अहमद अल-हुजैफी ने हौती समूह द्वारा हरम शरीफ और किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा की।
मुख्य बिंदु
AIमस्जिद-ए-नबवी के इमाम और खतीब, डॉ. अहमद बिन अली अल-हुजैफी ने मुसलमानों को अल्लाह से डरने और उसकी आज्ञा का पालन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तक़वा ही दुनिया और आख़िरत में सच्ची खुशहाली का रास्ता है और इंसान के लिए सबसे बेहतरीन पूंजी है।
अल-हुजैफी ने मदीना में मस्जिद-ए-नबवी से शुक्रवार के खुत्बे में बताया कि अल्लाह की किताब में ऐसे नियम और हिकमतें हैं, जो इंसान की समझ के लिए काफी हैं, दिलों को सुकून देती हैं और इंसान की पूरी ज़िंदगी का रास्ता तय करती हैं — उसके पैदा होने से लेकर मरने, दोबारा उठाए जाने, हिसाब और अंजाम तक।
उन्होंने सूरह क़ाफ़ के मायनों पर रुककर बताया कि पैगंबर मोहम्मद ﷺ शुक्रवार को इसी सूरह से खुत्बा दिया करते थे, क्योंकि इसमें दोबारा ज़िंदगी, आख़िरत, अल्लाह की रचनात्मक शक्ति और बीती क़ौमों के हालात जैसे अहम सबक और बड़े मायने छिपे हैं।
गफलत से चेतावनी और सबक लेने की दावत
उन्होंने कहा कि यह सूरह बताती है कि अल्लाह अपनी मख़लूक़ से पूरी तरह वाकिफ़ है, उम्र के खत्म होने और आख़िरत के आगमन की याद दिलाती है। उन्होंने गुज़री हुई क़ौमों के अंजाम से सबक लेने और अल्लाह व आख़िरत के दिन पर ईमान लाने की अहमियत पर ज़ोर दिया, जिससे मोमिन को ज़िंदगी में सुकून मिलता है।
हरम शरीफ पर हमले की निंदा
अल-हुजैफी ने हौती आतंकी समूह द्वारा मक्का और मदीना के साथ-साथ रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे इस्लामी शरीयत, इंसानी फितरत और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ़ एक गंभीर अपराध बताया।
उन्होंने कहा कि ये नाकाम हरकतें इतिहास के अन्य हमलावरों की तरह ही हैं। उन्होंने कुरान में वर्णित 'असहाब-ए-फील' (हाथी वालों) का हवाला देते हुए कहा कि अत्याचारियों की हार और अल्लाह की इच्छा के आगे उनकी नाकामी निश्चित है।
खुत्बे के अंत में उन्होंने दुआ की कि अल्लाह सऊदी अरब, उसकी क़ियादत और सैनिकों की हिफाजत करे और देश व जनता पर अमन-चैन कायम रखे।
