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सऊदी अरब

यमनी सरकार: 'फज्र यमन' अभियान से राज्य संस्थाओं की बहाली का नया दौर

यमनी सरकार ने कहा है कि राष्ट्रपति रशाद मोहम्मद अल-अलीमी द्वारा 'फज्र यमन' अभियान की शुरुआत संविधान और कानून के तहत नागरिकों की सुरक्षा के लिए की गई है।

अजेल हिंदी46 मिनट पहले · 6 मिनट का पठन
यमनी सरकार की बैठक और फज्र यमन अभियान की घोषणा

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यमनी सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति रशाद मोहम्मद अल-अलीमी द्वारा 'फज्र यमन' अभियान की शुरुआत संविधान और कानून के तहत नागरिकों की सुरक्षा, देश की संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा के लिए की गई है।

सरकार ने यमनी समाचार एजेंसी 'सबाअ' के हवाले से बताया कि यह अभियान राज्य की संस्थाओं की बहाली, हौथी विद्रोह के अंत और शेष यमनी क्षेत्रों की आज़ादी के लिए एक नया चरण है, जिसका उद्देश्य युद्ध की समाप्ति, देश और क्षेत्र में शांति-स्थिरता की बहाली और ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों द्वारा यमनी जनता के फैसलों की जब्ती को रोकना है।

यह बयान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यमन पर हुई खुली बैठक में यमन के स्थायी प्रतिनिधि अब्दुल्ला अल-सादी ने दिया।

सरकार ने दोहराया कि ये अभियान किसी क्षेत्र, प्रांत, मजहब या सामाजिक वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा, राष्ट्रीय संस्थाओं की बहाली और हथियार तथा युद्ध-शांति का फैसला केवल राज्य के हाथ में रखने के लिए हैं। सरकार ने कहा कि यह संघर्ष यमनी जनता और उसकी वैध सरकार तथा ईरान समर्थित हौथी मिलिशिया के बीच है।

सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और मानवीय कानूनों के पालन, नागरिकों और नागरिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, प्रतिशोध और बदले की कार्रवाई से बचाव, बंदियों और घायलों के साथ मानवीय व्यवहार और किसी भी उल्लंघन की जांच के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, भटके हुए लोगों को राज्य की ओर लौटने का अवसर देने की बात कही।

सरकार ने कहा कि व्यापक, टिकाऊ और वास्तविक शांति उसकी प्राथमिकता है, और यह शांति वही होगी जो विद्रोह को समाप्त कर राज्य की संपूर्ण भूमि और निर्णय पर नियंत्रण बहाल करे, जिससे नागरिकों के अधिकार, स्वतंत्रता और गरिमा सुरक्षित रहें, और यमन क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा न बने। इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2216 समेत सभी सहमत आधारों का पालन किया जाएगा।

सफीर अल-सादी ने कहा, "आज की बैठक ऐसे समय हो रही है जब हौथी आतंकवादी मिलिशिया की ओर से लगातार हमले हो रहे हैं, जो यमनी नागरिकों, पड़ोसी देशों और क्षेत्र की सुरक्षा के साथ-साथ दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों को भी खतरे में डाल रहे हैं। यह युद्ध के एक निर्णायक मोड़ पर है, इसलिए जरूरी है कि घटनाओं को सही संदर्भ में देखा जाए।"

उन्होंने कहा, "इस बढ़ते तनाव के लिए जिम्मेदार पक्ष को स्पष्ट करना जरूरी है; हौथी मिलिशिया ने ही बारह साल पहले सशस्त्र विद्रोह से युद्ध की शुरुआत की, शांति प्रयासों को नाकाम किया और हाल ही में संघर्षविराम तोड़ा, जबकि सरकार ने शांति के लिए कई बार भारी कीमत चुकाई।"

उन्होंने बताया कि हौथी मिलिशिया ने इन अवसरों का जवाब हथियारबंदी, भर्ती और हमलों से दिया, नागरिकों और बुनियादी ढांचे पर हमले किए, सऊदी अरब को निशाना बनाया और तैज, मुखा और बाब अल-मंदब में सैन्य स्थिति बदलने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि सरकार ने बार-बार चेतावनी दी थी कि इस व्यवहार को नजरअंदाज करने से शांति प्रयास विफल होंगे, हिंसा बढ़ेगी और मानवीय संकट गहरा जाएगा, जो अब सच हो चुका है।

अल-सादी ने बताया कि इस बढ़ते संघर्ष की मानवीय कीमत सरकार के सामने है — सितंबर में ही कम से कम 100 बच्चों की मौत हुई, क्योंकि हौथी मिलिशिया बच्चों की भर्ती कर रही है। उन्होंने कहा, "इन बच्चों की जगह स्कूलों और अपने परिवारों में है, न कि युद्ध के मैदान में।"

उन्होंने बताया कि हालिया हौथी हमलों के कारण करीब 2 लाख लोग देश में आंतरिक रूप से विस्थापित हुए हैं, जिनमें से अधिकांश तीसरी या चौथी बार पलायन कर रहे हैं, जबकि जिबूती में लगभग 3,000 यमनी शरणार्थी हैं, जिन्हें तत्काल मानवीय सहायता की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि हौथी हमलों ने रिहायशी इलाकों, बाजारों, स्कूलों, शरणार्थी शिविरों और नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया, जिससे युद्ध से पहले ही थकी हुई आबादी पर दबाव और बढ़ गया।

उन्होंने कहा, "परसों हौथी मिलिशिया ने अदन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से एक रनवे के पास गिरी, जिससे यात्रियों, कर्मचारियों और विमानन सुरक्षा को गंभीर खतरा हुआ। यह वही तरीका है जैसा दिसंबर 2020 के आतंकी हमले में था।"

अल-सादी ने कहा कि हौथी मिलिशिया ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों, नागरिक और आर्थिक प्रतिष्ठानों पर हमले तेज कर दिए हैं। ये अपराध दिखाते हैं कि हौथी एक आतंकवादी समूह है, जो नागरिकों और अहम संस्थानों को निशाना बनाने से नहीं हिचकता, ताकि अपने अपराधों से ध्यान भटका सके और ईरानी हितों की सेवा कर सके।

उन्होंने बताया कि यमनी सशस्त्र बल, सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के समर्थन से, लाल सागर और बाब अल-मंदब की रक्षा कर रहे हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम जीवनरेखा है। उन्होंने कहा कि अगर नौवहन की स्वतंत्रता साझा हित है, तो उसकी सुरक्षा भी साझा जिम्मेदारी है, और यमनी जनता को इसकी कीमत अकेले नहीं चुकानी चाहिए।

अल-सादी ने सुरक्षा परिषद से आग्रह किया कि वह हौथी मिलिशिया को इस तनाव के लिए जिम्मेदार ठहराए, परिषद के फैसलों को लागू करे, खासकर प्रस्ताव 2216, और हथियार, तकनीक व फंडिंग के प्रवाह को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए, जिनमें ईरान की भूमिका भी शामिल है। साथ ही, सरकार के साथ मिलकर तस्करी और फंडिंग नेटवर्क का मुकाबला किया जाए।

उन्होंने राज्य संस्थाओं को राजनीतिक, आर्थिक, मानवीय और सुरक्षा सहायता देने, नागरिकों की सुरक्षा और विस्थापितों की मदद की क्षमता बढ़ाने की भी मांग की, ताकि वे उन लाखों यमनी नागरिकों की मदद कर सकें, जिन्हें हौथी मिलिशिया ने देश और विदेश में बेघर कर दिया है।

अल-सादी ने सऊदी अरब के नेतृत्व, सरकार और जनता का आभार जताया, जिन्होंने यमनी जनता और सरकार के साथ लगातार समर्थन दिया, जिसमें हाल ही में बजट सहायता भी शामिल है, जबकि देश अभूतपूर्व आर्थिक और मानवीय चुनौतियों का सामना कर रहा है।

उन्होंने कहा, "यह समर्थन केवल रक्षा, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं, बल्कि यमनी नागरिकों के जीवन, सम्मान और परिवारों की स्थिरता तक फैला है। किंग सलमान ने राष्ट्रपति रशाद मोहम्मद अल-अलीमी के अनुरोध पर सऊदी अरब में अवैध रूप से रह रहे यमनी नागरिकों के हालात सुधारने के लिए अहम मानवीय कदम उठाए हैं, जिससे हजारों यमनी परिवारों को राहत मिली है।"

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी केवल संकट प्रबंधन या सुरक्षा प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यमनी नागरिकों की सुरक्षा, आजीविका और संस्थाओं की क्षमता बढ़ाने तक होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, "अगर सऊदी अरब ने एक व्यावहारिक एकजुटता का उदाहरण पेश किया है, तो हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझेदारों से भी यही अपेक्षा करते हैं कि वे यमनी सरकार को आर्थिक और मानवीय सहायता बढ़ाएं, ताकि हौथी मिलिशिया और ईरान समर्थित आतंकवाद के कारण बढ़ती पीड़ा को कम किया जा सके।"

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