मक्का पर ड्रोन हमले की कोशिश की अरब-इस्लामी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा
मक्का को ड्रोन से निशाना बनाने की हूती कोशिश की अरब, इस्लामी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी निंदा हुई है। कई देशों और संगठनों ने पवित्र स्थलों की सुरक्षा पर ज़ोर दिया।
मुख्य बिंदु
AIबुधवार से गुरुवार तक मक्का को ड्रोन से निशाना बनाने की हूती मिलिशिया की कोशिश की अरब, इस्लामी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी निंदा हुई है। यह विरोध केवल अरब और इस्लामी देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और अन्य देशों ने भी पवित्र स्थलों की सुरक्षा और सऊदी अरब की सुरक्षा पर ज़ोर दिया।
सऊदी अरब ने मंगलवार 15 सितंबर 2026 को मक्का की ओर भेजे गए हूती ड्रोन को उसके पवित्र शहर के हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही नष्ट कर दिया। सऊदी अरब ने इसे पवित्र स्थलों की बेअदबी और दुनियाभर के मुसलमानों की भावनाओं का अपमान बताया। यह मक्का को निशाना बनाने की दूसरी कोशिश थी, इससे पहले 27 जुलाई 2017 को भी ऐसी कोशिश हो चुकी है।
जैसे-जैसे आधिकारिक बयान आते गए, मिस्र, कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, लेबनान, फिलिस्तीन, सीरिया, अल्जीरिया, लीबिया के साथ-साथ तुर्की, पाकिस्तान, मलेशिया, भारत, बांग्लादेश, दक्षिण कोरिया और बुल्गारिया ने भी इस आतंकी हमले की निंदा की। अरब लीग, इस्लामी सहयोग संगठन, अल-अजहर, मुस्लिम वर्ल्ड लीग, अंतरराष्ट्रीय इस्लामी फिक्ह अकादमी और संयुक्त राष्ट्र ने भी विरोध जताया।
सऊदी अरब: पवित्र स्थलों की बेअदबी
सऊदी विदेश मंत्रालय ने मक्का की ओर भेजे गए हूती ड्रोन की कड़ी निंदा की और कहा कि यह हमला पवित्र स्थलों की बेअदबी और दुनियाभर के मुसलमानों की भावनाओं का अपमान है।
सऊदी अरब ने अपनी वायु रक्षा बलों की सतर्कता की सराहना की, जिन्होंने ड्रोन को नष्ट कर दिया। सऊदी ने कहा कि वह हर जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखता है ताकि हरम शरीफ, उसके मेहमानों, अपनी ज़मीन, नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा कर सके।
सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हूती हमलों की निंदा करने और पवित्र स्थलों, नागरिक और आर्थिक ठिकानों तथा समुद्री यातायात को निशाना बनाए जाने के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की अपील दोहराई।
खाड़ी सहयोग परिषद: सभी सीमाएँ पार
खाड़ी सहयोग परिषद के महासचिव जासिम अल-बदावी ने मक्का को ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश को बेहद खतरनाक और सभी सीमाओं का उल्लंघन बताया।
उन्होंने कहा कि पवित्र शहर को निशाना बनाना दुनिया के सबसे पवित्र स्थल और मुसलमानों की क़िबला की बेअदबी है। उन्होंने ऐसे हमलों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सख्त रुख अपनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
मिस्र: पवित्र स्थलों का उल्लंघन
मिस्र ने मक्का को निशाना बनाने की निंदनीय कोशिश की कड़ी निंदा की और कहा कि यह धार्मिक स्थलों की बेअदबी है।
काहिरा ने कहा कि ऐसे हमले इस्लामी मूल्यों के खिलाफ हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं। मिस्र ने सऊदी अरब की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए उठाए गए सभी कदमों का समर्थन किया।
लगातार अरब देशों की निंदा
कतर ने भी मक्का को निशाना बनाने की कोशिश की निंदा की और कहा कि पवित्र स्थलों की सुरक्षा और उनके आगंतुकों की सलामती से कोई समझौता नहीं हो सकता।
कुवैत, जॉर्डन और बहरीन ने भी हमले की निंदा की और सऊदी अरब की सुरक्षा, संप्रभुता और हरम शरीफ की सुरक्षा में एकजुटता जताई।
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन, प्रधानमंत्री नवाफ सलाम और विदेश मंत्रालय ने मक्का को निशाना बनाने की कोशिश की निंदा की और सऊदी अरब की सुरक्षा और पवित्र स्थलों की बेअदबी के खिलाफ चेतावनी दी।
फिलिस्तीनी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि सऊदी अरब और हरम शरीफ की सुरक्षा 'लाल रेखा' है और यह अरब-इस्लामी सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा है।
सीरिया ने भी ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि पवित्र शहर, उसके मेहमानों, नागरिकों और निवासियों की सुरक्षा को खतरे में डालना गंभीर उल्लंघन है।
लीबिया की राष्ट्रीय एकता सरकार ने मुसलमानों की क़िबला और पवित्र स्थलों को निशाना बनाने की किसी भी कोशिश को पूरी तरह खारिज किया और सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई।
अल्जीरिया ने मक्का पर हमले को मुसलमानों की पवित्रता के खिलाफ गंभीर आक्रामकता और भावनाओं का अपमान बताया और क्षेत्र में तनाव खत्म करने की अपील की।
अरब लीग और अल-अजहर: मक्का की सुरक्षा सर्वोपरि
अरब लीग ने कहा कि मक्का और पवित्र स्थलों की सुरक्षा से खिलवाड़ बेहद खतरनाक है, इससे सऊदी अरब, उसके नागरिकों, निवासियों और हरम शरीफ के आगंतुकों की सुरक्षा को खतरा है।
अरब लीग के महासचिव ने सऊदी वायु रक्षा बलों की सतर्कता की सराहना की और सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई।
अल-अजहर ने भी मक्का को निशाना बनाने की कोशिश की निंदा की और कहा कि पवित्र शहर को खतरे में डालना पवित्र स्थलों की बेअदबी और मुसलमानों की भावनाओं का अपमान है।
अंतरराष्ट्रीय इस्लामी फिक्ह अकादमी ने कहा कि नागरिकों और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाना इस्लाम, मानवता और अंतरराष्ट्रीय संधियों के खिलाफ है।
मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने भी मक्का और मदीना को निशाना बनाने की हूती कोशिशों की निंदा की और पवित्र स्थलों की सुरक्षा पर ज़ोर दिया।
तुर्की, पाकिस्तान और अन्य इस्लामी देशों की प्रतिक्रिया
तुर्की ने मक्का को निशाना बनाने की हूती कोशिश की कड़ी निंदा की और सऊदी अरब की संप्रभुता और सुरक्षा के समर्थन का आश्वासन दिया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हमले को शर्मनाक बताया और सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई।
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने घटना पर गहरी चिंता जताई और कहा कि मक्का की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
भारत ने भी घटना पर गहरी चिंता जताई और कहा कि इससे नागरिकों और बुनियादी ढांचे को खतरा हो सकता है। भारत ने मक्का की मुसलमानों के लिए विशेष अहमियत को दोहराया।
बांग्लादेश ने भी ड्रोन हमले की निंदा की और मक्का और सऊदी अरब के पवित्र स्थलों की पवित्रता के प्रति सम्मान और सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध
अरब और इस्लामी देशों के अलावा, बुल्गारिया ने भी सऊदी अरब पर हूती हमलों की निंदा की, जिसमें नागरिक और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। बुल्गारिया ने इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया।
दक्षिण कोरिया ने भी सऊदी अरब के नागरिक और आर्थिक ठिकानों पर हूती हमलों की निंदा की और इन्हें तुरंत रोकने की मांग की। उसने कहा कि नागरिकों और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाना और समुद्री यातायात को बाधित करना किसी भी हाल में जायज़ नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र ने भी सऊदी अरब की नागरिक बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र पर हूती हमलों की निंदा की और लाल सागर की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की रक्षा पर ज़ोर दिया।
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी कि समुद्री मार्गों में जारी अशांति का असर वैश्विक शांति, ऊर्जा बाजार, खाद्य सुरक्षा और कमजोर अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।
पिछले कुछ घंटों में आए इन बयानों से साफ है कि मक्का को निशाना बनाने की कोशिश को लेकर संवेदनशीलता कितनी अधिक है। क्षेत्र में लगातार तनाव के बीच पवित्र स्थलों की सुरक्षा और हरम शरीफ की सलामती सभी के लिए प्राथमिकता बनी हुई है।