पुनर्वासित गिद्ध अर्मेनिया और इराक में स्थिर
प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अभयारण्य से छोड़े गए दो गिद्ध अब अर्मेनिया और इराक में स्थिर हुए, जिनमें से एक ने आठ और दूसरे ने पाँच देशों की यात्रा की।
मुख्य बिंदु
AIप्रिंस मोहम्मद बिन सलमान शाही अभयारण्य द्वारा अंतरराष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस पर जारी ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि वहां से छोड़े गए दो गिद्ध (Gyps fulvus) अब अर्मेनिया और इराक में स्थिर हो गए हैं। इन दोनों गिद्धों को अभयारण्य से छोड़ा गया था, जिनमें से एक को तीन साल पहले और दूसरे को अप्रैल 2023 में छोड़ा गया था।
अभयारण्य के अनुसार, गिद्ध संख्या 536 अर्मेनिया में और गिद्ध संख्या 535 इराक में स्थिर हुआ है। दोनों पक्षियों ने भोजन की तलाश में 17 महीने आसमान में बिताए और बीते 24 महीनों में अपने मौजूदा स्थान से 100 किलोमीटर से अधिक दूर नहीं गए।
अभयारण्य ने बताया कि उड़ान के पैटर्न से स्पष्ट है कि दोनों गिद्ध अब अपने-अपने क्षेत्रों में जंगली गिद्धों के झुंड में शामिल हो चुके हैं। गिद्धों का चुनी हुई प्रजनन कॉलोनी में बसना एक सामान्य व्यवहार है। जैसे-जैसे ये गिद्ध परिपक्व होते हैं, वे लंबी दूरी के प्रवासी से स्थानीय स्तर पर सीमित क्षेत्र में रहने वाले पक्षी बन जाते हैं, जो संसाधनों की उपलब्धता और पर्यावरणीय बदलावों से प्रभावित होता है।
अभयारण्य के अनुसार, गिद्ध संख्या 536 को अप्रैल 2023 में उत्तर-पश्चिम सऊदी अरब स्थित अभयारण्य से छोड़ा गया था और उसने जॉर्डन, सीरिया, इराक, तुर्की, अर्मेनिया, अज़रबैजान और ईरान सहित आठ देशों की यात्रा की। वहीं, गिद्ध संख्या 535 ने सऊदी अरब, जॉर्डन, इराक, तुर्की और ईरान — कुल पाँच देशों की यात्रा की। दोनों ने लगभग दो वर्षों तक अपेक्षाकृत छोटे क्षेत्रों में बसने से पहले पृथ्वी के छह चक्कर के बराबर दूरी तय की।
अभयारण्य के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंड्रयू जालोमिस ने कहा, "अभयारण्य में तकनीक के इस्तेमाल से हमें गिद्ध, बाज जैसी प्रवासी प्रजातियों और हरे कछुए जैसी प्रजातियों को वास्तविक समय में ट्रैक करने में मदद मिलती है। इससे प्रबंधन और संरक्षण की योजनाएँ बनाना संभव हुआ है, जो पहले संभव नहीं था। ये ट्रैकिंग डेटा सीमा पार संरक्षण उपायों की अहमियत को उजागर करते हैं।"
गौरतलब है कि गिद्ध को इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के अनुसार "कम खतरे" की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन दुनिया की लगभग 70% गिद्ध प्रजातियाँ विलुप्ति के खतरे में हैं। इन दोनों गिद्धों पर लगाए गए ट्रैकिंग उपकरण बायोडिग्रेडेबल बेल्ट से जुड़े हैं, जो समय के साथ खुद-ब-खुद अलग हो जाएंगे। अभयारण्य तब तक इन गिद्धों की निगरानी जारी रखेगा, जब तक ट्रैकिंग डिवाइस सक्रिय हैं।
