मिस्र के समर्थन की अहमियत पर विशेषज्ञ की राय
राजनीतिक सलाहकार डॉ. इमाद जाद ने कहा कि मिस्र की सेना को विदेश भेजने के लिए संसद और सेना परिषद की मंजूरी जरूरी है।
मुख्य बिंदु
AIअल-अहराम सेंटर फॉर पॉलिटिकल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज के सलाहकार डॉ. इमाद जाद ने कहा कि मिस्र की सेना को सीमाओं के बाहर भेजने के लिए सुप्रीम मिलिट्री काउंसिल और संसद की मंजूरी जरूरी है।
डॉ. इमाद ने 'अल अरबिया एफएम' से बातचीत में बताया कि संसद की बैठक बुलाने की अपील की गई है, ताकि राष्ट्रपति को सऊदी अरब के समर्थन के लिए अधिकृत किया जा सके। उन्होंने कहा कि मिस्री सेना की भागीदारी से कई स्तरों पर बदलाव आएगा, जिसमें सऊदी सीमा पर हवाई रक्षा बल भेजना भी शामिल है, ताकि किसी भी मिसाइल या ड्रोन हमले का जवाब दिया जा सके।
जाद ने यह भी कहा कि मिस्र के पास अत्याधुनिक वायुसेना है, जो सऊदी अरब की जरूरत के मुताबिक उसकी जमीन की सुरक्षा या हौथियों के ठिकानों पर हवाई हमलों में भागीदारी कर सकती है। उन्होंने दोनों देशों के मजबूत संबंधों और साझा हितों का जिक्र करते हुए कहा कि सऊदी अरब की सुरक्षा मिस्र की राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है।
मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फत्ताह अल-सीसी पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि मिस्र खाड़ी देशों की सुरक्षा से समझौता नहीं होने देगा। उन्होंने सभी पक्षों से युद्ध और संघर्ष रोकने की अपील की है।
उन्होंने आगे कहा कि मिस्र, किंग सलमान और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निर्देशों के अनुसार, सऊदी अरब की सुरक्षा और रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
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