रियाद में 'सुरक्षा और इतिहास संवाद 2026' भविष्य की चुनौतियों से निपटने में अहम
खाड़ी सहयोग परिषद के महासचिव जासिम मोहम्मद अल-बदिउई ने कहा कि सुरक्षा और इतिहास संवाद सम्मेलन सुरक्षा विशेषज्ञता बढ़ाने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभाता है।
मुख्य बिंदु
AIखाड़ी सहयोग परिषद के महासचिव जासिम मोहम्मद अल-बदिउई ने कहा कि सुरक्षा और इतिहास संवाद सम्मेलन सुरक्षा विशेषज्ञता बढ़ाने और भविष्य की चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभाता है।
यह बात उन्होंने 'हमारा इतिहास और भविष्य... सुरक्षा और विकास' थीम पर आयोजित सम्मेलन में कही, जो आज रविवार को रियाद में आंतरिक मंत्री प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सऊद बिन नाएफ के संरक्षण में हुआ। इसमें देश-विदेश से 160 से अधिक वक्ताओं सहित वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और शिक्षाविद शामिल हुए, जिन्होंने सुरक्षा और विकास के क्षेत्र में ऐतिहासिक अनुभवों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की।
अपने संबोधन की शुरुआत में अल-बदिउई ने प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सऊद बिन नाएफ और मंत्रालय के सभी सदस्यों को सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि सुरक्षा हमेशा से ही खाड़ी सहयोग परिषद की प्राथमिकता रही है और आज यह साझा सुरक्षा और समन्वय के उच्च स्तर तक पहुँच चुकी है। उन्होंने कहा कि परिषद की ताकत उसके सदस्य देशों की एकजुटता और साझा चुनौतियों का मिलकर सामना करने की क्षमता में है।
महासचिव ने आगे कहा कि अपराध और सीमा-पार खतरों की बदलती प्रकृति के चलते अब केवल घटना के बाद कार्रवाई नहीं, बल्कि अपराध की रोकथाम, नेटवर्क का विघटन और संसाधनों को रोकना ज़रूरी है। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों ने नशीली दवाओं और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ उल्लेखनीय प्रगति की है, साथ ही साइबर अपराध और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े अपराधों से निपटने के लिए साझा रणनीति भी तैयार की जा चुकी है।
अल-बदिउई ने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकें सुरक्षा कार्यों को बेहतर बनाने का बड़ा अवसर हैं, लेकिन इनके दुरुपयोग से नई चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। परिषद के देश अपनी क्षमताएँ बढ़ा रहे हैं ताकि भविष्य के अपराधों का पूर्वानुमान और मुकाबला किया जा सके, और मानव, परिवार व समाज की सुरक्षा को केंद्र में रखा जा सके। उन्होंने साझा सुरक्षा अभ्यासों, खासकर 'अरब खाड़ी सुरक्षा' अभ्यास को सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने का व्यावहारिक उदाहरण बताया।
अल-बदिउई ने यह भी कहा कि परिषद के देशों के सफल अनुभव साझा खाड़ी पूंजी हैं, जिनसे सभी देश लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने ज़ोर दिया कि सुरक्षा और विकास का रिश्ता अब और गहरा हो गया है — सुरक्षा, विकास की रक्षा करती है और तकनीक के ज़रिए खतरों का पूर्वानुमान और मानव की सुरक्षा संभव हो रही है।
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