बुरैदा खजूर कार्निवल में दुर्लभ किस्में, कसीम की कृषि विरासत को बढ़ावा
बुरैदा खजूर कार्निवल में 100 से अधिक किस्में प्रदर्शित, जिनमें दुर्लभ प्रजातियाँ कसीम की खजूर विरासत को संरक्षित करती हैं।
मुख्य बिंदु
AIकसीम क्षेत्र में आयोजित बुरैदा खजूर कार्निवल में 100 से अधिक किस्मों की खजूरों की अनूठी प्रदर्शनी लगाई गई है, जिनमें कई दुर्लभ प्रजातियाँ भी शामिल हैं। ये किस्में अपने खास आकार, स्वाद और रंग के कारण किसानों और खजूर प्रेमियों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। यह कार्निवल इन किस्मों को पहचान दिलाने का मंच है, जो क्षेत्र की पीढ़ियों से चली आ रही कृषि विरासत का हिस्सा हैं, जैसे नब्त सैफ, नब्त अली, हलवा, वनाना, मक्तूमी, खदरी, रोथाना और सफावी।
ये दुर्लभ किस्में अपनी विविधता के कारण कार्निवल में आने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित करती हैं। किसान ऐसी किस्में भी पेश कर रहे हैं, जिनका उत्पादन सीमित है और जो बड़े पैमाने पर नहीं उगाई जातीं। वहीं कुछ किस्में स्थानीय और पारंपरिक हैं, जिनका कसीम की कृषि संस्कृति से दशकों पुराना रिश्ता है।
आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन इन किस्मों के कृषि और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करता है और किसानों व विशेषज्ञों को खजूर की खेती, देखभाल, संरक्षण और विपणन पर अनुभव साझा करने का अवसर देता है।
जैव विविधता और कृषि विरासत की स्थिरता को बढ़ावा
कार्निवल में दुर्लभ खजूर किस्मों की उपस्थिति से खजूर की जैव विविधता को संरक्षित करने का महत्व रेखांकित होता है। यह कसीम की कृषि संपदा का हिस्सा है और खजूर क्षेत्र में उत्पादन, विपणन और प्रसंस्करण के बढ़ते अवसरों के लिए अहम है।
इन किस्मों के जरिए किसान अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा सकते हैं और उन प्रजातियों को पुनर्जीवित कर सकते हैं, जिनकी खेती हाल के वर्षों में कम हो गई थी। इससे कृषि विरासत का संरक्षण और उसकी स्थिरता आने वाली पीढ़ियों के लिए सुनिश्चित होती है।
दुनियाभर में पहचान, सऊदी विजन 2030 को समर्थन
गौरतलब है कि बुरैदा अंतरराष्ट्रीय खजूर कार्निवल हर साल 1 अगस्त से मध्य अक्टूबर तक 75 दिनों के लिए आयोजित होता है। इसका आयोजन राष्ट्रीय खजूर और ताड़ केंद्र करता है। यह आयोजन सऊदी विजन 2030 के तहत कृषि क्षेत्र के विकास और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के लक्ष्यों के अनुरूप है और अब यह एक वैश्विक आर्थिक और कृषि आयोजन बन चुका है।
