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शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 · रियाद
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सऊदी अरब

सऊदी अरब में चंद्रमा-थुरैया का मिलन, गर्मी के अंत का संकेत

आज सुबह सऊदी अरब में चंद्रमा और थुरैया का मिलन दिखा, जो गर्मी के अंत और तापमान में गिरावट का पारंपरिक संकेत है।

अजेल हिंदी25 मिनट पहले · 2 मिनट का पठन
सऊदी अरब के आसमान में चंद्रमा और थुरैया का मिलन

मुख्य बिंदु

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आज सुबह सऊदी अरब के आसमान में चंद्रमा और थुरैया नक्षत्र का मिलन देखने को मिला, जिसे अरब लोक परंपरा में 'क़रान 23' कहा जाता है। यह खगोलीय घटना उन मौसमी संकेतों में से है, जिन पर प्राचीन अरब मौसम और कृषि कैलेंडर तय करते थे। यह घटना गर्मी के तीसरे महीने की शुरुआत और तापमान में गिरावट के करीब आने का संकेत देती है, जो जल्द ही सुहैल तारे के उदय की ओर बढ़ती है।

खगोल क्लब के सदस्य मोहम्मद अनाद अल-हुज़ैमी ने बताया कि यह घटना 'कलीबीन' नामक अवधि की शुरुआत के साथ होती है, जो इस समय के पहले दो हफ्तों तक चलती है, जबकि सुहैल तारा इसके अंत में दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि रेगिस्तानी लोग इस मिलन को भीषण गर्मी के अंत और तापमान में धीरे-धीरे गिरावट के संकेत के रूप में मानते हैं। इस दौरान तटीय इलाकों में नमी बढ़ती है, जिससे बादल और घने बादल बनने की संभावना रहती है।

किसानों और लोक परंपरा के लिए महत्व

हुज़ैमी ने आगे बताया कि यह चरण लगभग 27 दिन तक चलता है और किसानों के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि इसी दौरान अंगूर और रुताब (अधपके खजूर) पकते हैं और खजूर की फसल की कटाई शुरू होती है। उन्होंने लोक कहावत का हवाला दिया—'बारहवें आब (अरबी कैलेंडर का महीना) को अंगूर गिरते हैं और रुताब पकते हैं'—जो इस दौरान फसलों की प्रचुरता को दर्शाता है। यह समय खेती की देखभाल और सिंचाई बढ़ाने के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।

इसी संदर्भ में, हुज़ैमी ने बताया कि चंद्रमा और थुरैया का यह मिलन अरबों के लिए हमेशा से मौसम, जलवायु परिवर्तन और नए मौसमी चरणों के आगमन का संकेत रहा है। यह प्रणाली चंद्रमा की अवस्थाओं और तारों की गति पर आधारित है। आज भी यह घटना खगोल विज्ञान और लोक परंपरा के जानकारों के लिए खास महत्व रखती है, क्योंकि यह गर्मी के अंत और सुहैल तारे के मौसम के आगमन की ओर इशारा करती है, जिससे मौसम में धीरे-धीरे ठंडक आने लगती है।

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