मेसान देश की सबसे स्वच्छ हवा वाली प्रांत बनी
मक्का क्षेत्र की मेसान प्रांत ने 2026 की तीसरी तिमाही में सऊदी अरब में सबसे स्वच्छ हवा का दर्जा पाया है।
मुख्य बिंदु
AIमक्का क्षेत्र की मेसान प्रांत ने 2026 की तीसरी तिमाही में सऊदी अरब में सबसे स्वच्छ हवा वाली प्रांतों की सूची में पहला स्थान हासिल किया है। यह जानकारी राष्ट्रीय पर्यावरण अनुपालन निगरानी केंद्र द्वारा जारी वायु गुणवत्ता आकलन के नतीजों में सामने आई है।
केंद्र के आधिकारिक प्रवक्ता साद अल-मुतरफी ने बताया कि यह रैंकिंग केंद्र द्वारा स्वीकृत मानकों के अनुसार वायु गुणवत्ता माप के नतीजों पर आधारित है। इसमें अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी और खाड़ी सहयोग परिषद की मानक संदर्भित की गई हैं, जिससे निगरानी वाले क्षेत्रों में वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर वायु गुणवत्ता का मूल्यांकन संभव हुआ।
मुतरफी ने बताया कि हाइल क्षेत्र की चार प्रांतों ने शीर्ष दस में जगह बनाई। सूची में मेसान पहले, हाइल क्षेत्र का हैलिट दूसरा, कसीम का शमासिया तीसरा, मक्का का रनिया चौथा, हाइल के सलीमी और शनान क्रमशः पांचवें और छठे, जौफ का सुवैर सातवां, कसीम का खबरा आठवां, हाइल का अजफर नौवां और मदीना का खैबर दसवें स्थान पर रहा।
केंद्र ने बताया कि हाइल क्षेत्र की चार प्रांतों को सूची में स्थान मिला, जबकि मक्का और कसीम को दो-दो और जौफ व मदीना को एक-एक स्थान मिला। केंद्र ने यह भी कहा कि निगरानी के नतीजे वायु गुणवत्ता के स्तर और प्रांतों के बीच अंतर को समझने में अहम संकेतक हैं, जो पर्यावरण सुधार और जीवन गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयासों को समर्थन देते हैं।
केंद्र में पर्यावरणीय डेटा मॉडलिंग और विश्लेषण के महाप्रबंधक डॉ. मोहम्मद अल-दघरिरी ने बताया कि यह रैंकिंग देशभर में फैली 241 वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों के डेटा पर आधारित है। ये माप स्वतः केंद्रीय निगरानी कक्षों तक पहुंचती हैं और तकनीकी विश्लेषण व समीक्षा के बाद नतीजों को स्वीकृत किया जाता है।
डॉ. दघरिरी ने बताया कि नतीजों की विश्वसनीयता तकनीकी मानकों पर निर्भर करती है, जिसमें माप की नियमितता, डेटा की सटीकता और गुणवत्ता, स्टेशनों की परिचालन स्थिति और तकनीकी खराबियों की न्यूनता शामिल है। साथ ही, स्टेशनों का भौगोलिक वितरण भी शहरों के आकार और घनत्व के अनुसार तय किया जाता है।
उन्होंने जोड़ा कि निगरानी स्टेशनों की संख्या शहरों की विशेषताओं के अनुसार बदलती है—कुछ छोटे शहरों में एक स्टेशन है, जबकि बड़े शहरों में आठ तक स्टेशन मौजूद हैं। इससे भौगोलिक कवरेज बेहतर होती है और आसपास की हवा में प्रदूषकों के स्तर के आकलन में मदद मिलती है।
राष्ट्रीय पर्यावरण अनुपालन निगरानी केंद्र ने जोर दिया कि वायु गुणवत्ता माप के नतीजे पर्यावरणीय और निगरानी निर्णयों के लिए एक अहम उपकरण हैं। इससे प्रदूषकों के स्तर की पहचान, उनके बदलाव की निगरानी और प्रदूषण के स्रोतों को कम करने, जनस्वास्थ्य की रक्षा और देशभर में जीवन गुणवत्ता सुधारने के लिए जरूरी जानकारी मिलती है।
