स्कूल फिटनेस जांच का मकसद छात्रों की सेहत की पुष्टि
डॉ. वलीद अल-बदइवी ने कहा कि अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को स्कूल फिटनेस जांच के लिए मानसिक रूप से तैयार करें ताकि वे जांच के दौरान घबराएं नहीं।
मुख्य बिंदु
AIपरिवार चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. वलीद अल-बदइवी ने कहा है कि अभिभावकों को अपने बच्चों को स्कूल फिटनेस जांच के लिए तैयार करना चाहिए, ताकि वे जांच के दौरान डर या घबराहट महसूस न करें।
उन्होंने 'अल-इखबारीया' चैनल से फोन पर बातचीत में बताया कि स्कूल फिटनेस जांच का उद्देश्य छात्रों की समग्र सेहत की पुष्टि करना और किसी भी बीमारी का शुरुआती स्तर पर पता लगाना है, जो उनकी सीखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
डॉ. अल-बदइवी ने जोर देकर कहा कि यह पहल बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर जब बच्चों में कोई स्वास्थ्य समस्या हो, जिसे समय रहते पहचाना जा सके।
एक्स प्लेटफॉर्म पर ट्वीट देखें
स्वास्थ्य मंत्रालय पहले ही स्कूल फिटनेस जांच की जानकारी दे चुका है, जो पहली कक्षा में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए अनिवार्य है। मंत्रालय ने बताया कि इसका मकसद पढ़ाई शुरू होने से पहले छात्रों के कई अहम स्वास्थ्य संकेतकों का मूल्यांकन करना है।
मंत्रालय के मुताबिक, इस जांच में दृष्टि क्षमता, बॉडी मास इंडेक्स, दांतों की सेहत, सुनने की क्षमता, बोलने की स्पष्टता, साथ ही क्लीनिकल जांच और जरूरी टीकों की स्थिति की पुष्टि शामिल है।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यह जांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की फैमिली मेडिसिन क्लीनिकों में की जाती है, जिसके लिए 'सहती' ऐप के जरिए पहले से अपॉइंटमेंट लेना जरूरी है।
