विश्व फेफड़ों के कैंसर दिवस: सबसे बड़ा खतरा, इलाज में प्रगति
विश्व फेफड़ों के कैंसर दिवस पर विशेषज्ञों ने बताया कि धूम्रपान इस बीमारी का मुख्य कारण है, वहीं सऊदी अरब रोकथाम और इलाज में लगातार प्रगति कर रहा है।
मुख्य बिंदु
AIआज शनिवार, 1 अगस्त को विश्व फेफड़ों के कैंसर दिवस है। यह बीमारी दुनियाभर में सबसे घातक कैंसर के रूप में जानी जाती है, जबकि इसके मुख्य कारण, खासकर धूम्रपान, पहले से स्पष्ट हैं।
किंग फैसल स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के फेफड़ा सर्जरी और प्रत्यारोपण विशेषज्ञ, और अल-फैसल यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज के डीन, डॉ. खालिद अल-कत्तान ने बताया कि धूम्रपान छोड़ना इस बीमारी को रोकने की 'पहली और सबसे अहम' बुनियाद है, जो किसी भी आधुनिक जांच या इलाज से अधिक प्रभावी है।
जांच और इलाज में प्रगति
डॉ. कत्तान के अनुसार, शुरुआती जांच की तकनीकें, जैसे पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (PET-CT), अब बीमारी की अवस्थाओं की अधिक सटीक पहचान कर सकती हैं, जिससे हर मरीज के लिए विशेष इलाज योजना बनाना संभव हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि इम्यूनोथेरेपी ने इलाज में क्रांतिकारी बदलाव लाया है, क्योंकि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में सक्षम बनाती है, जिससे बीमारी पर नियंत्रण और मरीजों की उम्र बढ़ाने में आशाजनक नतीजे मिले हैं।
सर्जरी के क्षेत्र में, डॉ. कत्तान ने बताया कि एंडोस्कोपी और रोबोटिक सर्जरी के इस्तेमाल से जटिलताएँ कम हुई हैं, मरीजों की रिकवरी तेज हुई है और सर्जिकल परिणाम बेहतर हुए हैं।
सऊदी अरब की उपलब्धियाँ
डॉ. कत्तान ने इस क्षेत्र में सऊदी अरब की प्रगति को विजन 2030 से जोड़ा, जिसमें रोकथाम, शुरुआती जांच और जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत शोध को बढ़ावा, उन्नत जांच मानकों का पालन, धूम्रपान विरोधी अभियान और जोखिमग्रस्त वर्गों को जागरूक करने के लिए विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक-चैरिटी संस्थाओं के साथ सहयोग किया जा रहा है।
डॉ. कत्तान ने यह भी कहा कि सऊदी अस्पतालों में आधुनिक तकनीकों और राष्ट्रीय विशेषज्ञता के विस्तार से इलाज के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार आया है, जिससे देश फेफड़ों के कैंसर के इलाज में अग्रणी देशों में शामिल हो गया है। अंत में उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस लड़ाई में सबसे अहम फैसला खुद धूम्रपान करने वालों के हाथ में है—उन्हें तुरंत धूम्रपान छोड़ना चाहिए।
