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सऊदी अरब

सऊदी अरब ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में फंसे नाविकों की सुरक्षा पर दिया जोर

सऊदी अरब ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में फंसे नाविकों की मानवीय हालात और उनके अधिकारों की रक्षा की अहमियत को रेखांकित किया है।

अजेल हिंदी1 घंटे पहले · 2 मिनट का पठन
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज और नाविकों की सुरक्षा

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सऊदी अरब ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में फंसे नाविकों की सुरक्षा की अहमियत पर जोर दिया है, जहां वे गंभीर मानवीय परिस्थितियों और अपने बुनियादी अधिकारों को खतरे में पाते हैं।

यह बात संयुक्त बयान में कही गई, जिसे संयुक्त राष्ट्र जिनेवा में सऊदी अरब के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत अब्दुल मोहसिन बिन खुथैला ने विभिन्न क्षेत्रीय देशों के समूह की ओर से मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान चौथे बिंदु पर आम चर्चा में प्रस्तुत किया।

राजदूत ने समूह की ओर से बयान में नाविकों की लगातार असुरक्षा और कठिन जीवन स्थितियों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने नागरिक जहाजों पर हमलों के चलते चालक दल के सदस्यों के हताहत और घायल होने का उल्लेख किया, जबकि कई नाविक अब भी भोजन, पीने का पानी, ईंधन, दवाइयों और चिकित्सकीय देखभाल जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने मानवाधिकार परिषद के प्रस्ताव संख्या 56/18 का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि नाविक श्रमिकों का एक ऐसा वर्ग हैं जिन्हें सुरक्षा की आवश्यकता है, और वे अपनी मौजूदा स्थिति के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उनकी जान, स्वास्थ्य, सुरक्षा और गरिमा की रक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।

संयुक्त बयान में संबंधित पक्षों द्वारा नाविकों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों का स्वागत किया गया। खासतौर पर खाड़ी देशों द्वारा अपनी बंदरगाह और समुद्री प्राधिकरणों के माध्यम से मानवीय पहलों—जैसे खोज और बचाव अभियान, आवश्यक आपूर्ति और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना, प्रशासनिक प्रक्रियाओं में लचीलापन और जहाजों के चालक दल के बदलाव को आसान बनाना—की सराहना की गई।

संयुक्त बयान के अंत में, सऊदी अरब ने समूह की ओर से देशों से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। साथ ही कहा कि उनकी सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के तहत, सुरक्षित और निर्बाध समुद्री यातायात की गारंटी से जुड़ी है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा तथा जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन की मांगें लगातार उठ रही हैं।

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