शमासिया में सईद महल का पुनर्निर्माण, दो सदियों की विरासत फिर जीवित
शमासिया का सईद महल परिवार की पुरानी दस्तावेज़ों के आधार पर पूरी तरह से बहाल किया गया, जिससे क्षेत्र का ऐतिहासिक स्वरूप फिर से जीवित हुआ।
मुख्य बिंदु
AIशमासिया प्रांत में स्थित सईद महल में एक अनूठा पुनर्निर्माण कार्य हुआ, जिसमें मुख्य रूप से परिवार द्वारा संजोई गई पुरानी दस्तावेज़ों और कागजातों का सहारा लिया गया। इससे दो सौ साल से अधिक पुराने इस ऐतिहासिक भवन की मूल पहचान और स्वरूप को फिर से जीवंत किया गया।
इंजीनियर खालिद सुलेमान अल सईद ने बताया कि परिवार ने महल को उसके पुराने रूप में लौटाने के लिए हर चरण में दस्तावेज़ों और कागजातों का उपयोग किया। उन्होंने कहा कि काम में हर बारीकी—दीवारें, नींव, दरवाजे, बाहरी दीवार, कुआँ और नक्काशी—शामिल रही। लगभग 90% महल की विशेषताएँ उसके पुराने स्वरूप के अनुसार बहाल की गईं।
वास्तुकला की बारीकियाँ और मौलिक पहचान
महल में तीन मंज़िलें, छत और कई कमरे व सुविधाएँ हैं, जो उस दौर की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को दर्शाती हैं—जैसे अनाज भंडारण और 'जस्सा'। सभी हिस्सों की मरम्मत केवल मिट्टी से की गई, ताकि पारंपरिक वास्तुकला की मौलिकता बनी रहे और आधुनिक निर्माण तकनीकों का इस्तेमाल न हो।
सईद महल का यह अनुभव विरासत भवनों के संरक्षण का एक अलग उदाहरण है, जहाँ मकसद किसी पुराने भवन को नया रूप देना नहीं, बल्कि उसकी असली पहचान और बारीकियों को यथासंभव सुरक्षित रखना था।
स्थानीय समाज की जीवित स्मृति
परियोजना के अंत में मिट्टी की दीवारें अपनी जगह लौटीं, दरवाजे अपनी असली दिशा में लगाए गए, साथ ही कुआँ, बाहरी दीवार और भंडारण की बारीकियाँ भी बहाल हुईं। यह सब एक ऐसे परिवार की कहानी कहता है, जिसने आने वाली पीढ़ियों के लिए अपने पूर्वजों की जीवनशैली की विरासत छोड़ने का संकल्प लिया। इस तरह महल दो सदियों से अधिक पुराने समाज और उसकी जड़ों का गवाह बना रहा।
