विशेषज्ञ: 'सरवात' और 'तुवैक' परियोजनाएँ क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करेंगी
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. सईद अल-क़ाज़ी ने कहा कि 'सरवात' और 'तुवैक' परियोजनाएँ मजबूत सैन्य प्रणालियाँ तैयार कर क्षेत्र और दुनिया में सुरक्षा व शांति को सुदृढ़ करेंगी।
मुख्य बिंदु
AIराजनीतिक विश्लेषक डॉ. सईद अल-क़ाज़ी ने कहा कि 'सरवात' और 'तुवैक' परियोजनाओं का उद्देश्य ऐसी मजबूत सैन्य प्रणालियाँ बनाना है, जो क्षेत्र और दुनिया में सुरक्षा और शांति की नींव को मजबूत करें।
डॉ. अल-क़ाज़ी ने 'अल-इख़बारिया' चैनल से बातचीत में कहा कि सऊदी अरब एक ऐसा रास्ता अपना रहा है, जो प्रतिरोध और शांति के समर्थन पर आधारित है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सऊदी सेनाएँ, उनके शब्दों में, प्रतिरोध और शांति की सेनाएँ हैं, न कि धमकी या आक्रामकता की।
उन्होंने आगे कहा कि सऊदी अरब ने अपने इतिहास में कभी आक्रामक शक्ति के रूप में काम नहीं किया, बल्कि हमेशा खतरों को रोकने और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने की भूमिका निभाई है।
राजनीतिक विश्लेषक ने यह भी कहा कि सैन्य क्षमताओं और प्रणालियों को मजबूत करना, उनकी दृष्टि में, सुरक्षा और शांति के समर्थन और खतरों का सामना करने की दिशा में है, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता बनी रहे।
X पर ट्वीट देखें
'सरवात' और 'तुवैक' परियोजनाएँ
गौरतलब है कि सऊदी नौसेना अपनी सैन्य प्रणालियों के विकास, संचालन क्षमता बढ़ाने और मानवीय व तकनीकी क्षमताओं को उन्नत करने के लिए रणनीतिक परियोजनाएँ लागू कर रही है, जिनमें 'सरवात' और 'तुवैक' प्रमुख हैं।
'सरवात' और 'तुवैक' परियोजनाएँ नौसैनिक क्षमताओं के विकास में बड़ा बदलाव लाती हैं। ये परियोजनाएँ सैन्य प्रणालियों के आधुनिकीकरण, तकनीक हस्तांतरण, सैन्य उद्योगों के स्थानीयकरण, राष्ट्रीय क्षमताओं के निर्माण और नौसैनिक आधारभूत संरचना के विकास के माध्यम से सऊदी विजन 2030 के तहत एक टिकाऊ राष्ट्रीय रक्षा औद्योगिक आधार और सशस्त्र बलों की संचालन क्षमता को मजबूत करने के लक्ष्यों के अनुरूप हैं।
