सऊदी अरब में अरब मृग संरक्षण की मिसाल बनी
सऊदी अरब ने अरब मृग को विलुप्ति से बचाकर उसकी वापसी कराई, जिससे यह वैश्विक संरक्षण का सफल मॉडल बना।
मुख्य बिंदु
AIसऊदी अरब ने पिछले चार दशकों में अरब मृग को उसके ऐतिहासिक आवासों में सफलतापूर्वक वापस लाने की यात्रा पूरी की है। यह प्रजाति 1970 के दशक में जंगली इलाकों से पूरी तरह गायब हो गई थी। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण समाधान मंच (PANORAMA) ने इस राष्ट्रीय प्रयास को दर्ज किया है, जिसमें राष्ट्रीय वन्यजीव विकास केंद्र की प्रजनन, पुनर्वास, आवास संरक्षण और निगरानी व प्रबंधन की योजनाओं को रेखांकित किया गया है।
साल 2011 में अरब मृग के वैश्विक दर्जे में बड़ा बदलाव आया, जब अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की लाल सूची में इसे 'विलुप्तप्राय' से 'संकटग्रस्त' की श्रेणी में रखा गया। यह पहली बार था जब किसी जंगली विलुप्त घोषित प्रजाति की स्थिति में इतना सुधार हुआ, जो राष्ट्रीय वन्यजीव केंद्र और साझेदारों के प्रयासों से संभव हुआ।
जंगली झुंडों का विस्तार
सऊदी अरब ने जंगली अरब मृग की संख्या बढ़ाने का सिलसिला जारी रखा है। राष्ट्रीय वन्यजीव विकास केंद्र के 2026 के आंकड़ों के अनुसार, देश के 11 स्थलों पर लगभग 3,064 अरब मृग मौजूद हैं और झुंडों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह उस राष्ट्रीय यात्रा का परिणाम है, जो प्रजाति को बचाने से शुरू होकर अब स्थायी और प्रजननक्षम जंगली झुंडों के निर्माण तक पहुंची है।
अरब मृग अरबी रेगिस्तान का प्रतीक है और रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत के लिए अहम है। यह बीज फैलाने, पेड़ों की छंटाई और वनस्पति के विकास में मदद करता है, जिससे इसकी वापसी जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता के लिए जरूरी मानी जाती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और समन्वित प्रयास
अरब मृग को बचाने के अंतरराष्ट्रीय प्रयास 1960 के दशक में शुरू हुए, जब IUCN ने अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव कोष के साथ मिलकर 'मृग परियोजना' चलाई। सऊदी अरब ने भी इसमें भागीदारी की और 1986 से अपना समग्र राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया। 1989 में इमाम सऊद बिन अब्दुलअज़ीज़ शाही अभयारण्य में पुनर्वास कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जो बाद में अरूक बनी मआरिद जैसे अन्य अभयारण्यों तक फैला।
सऊदी मॉडल में आवास की उपयुक्तता का आकलन, स्वास्थ्य, आनुवंशिक और व्यवहारिक मानकों के आधार पर संस्थापक मृगों का चयन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी शामिल रही, ताकि स्वस्थ और टिकाऊ झुंड तैयार किए जा सकें।
विजन 2030 को समर्थन
अरब मृग की वापसी की रफ्तार सऊदी विजन 2030 और सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव के साथ तेज हुई, जिनका लक्ष्य देश की 30% भूमि और समुद्री क्षेत्र की रक्षा, पारिस्थितिकी तंत्र का विकास और पर्यावरण सुरक्षा बल की स्थापना है। इससे संरक्षण कार्य एक समग्र प्रणाली में बदल गए।
प्रजनन कार्यक्रमों ने नए झुंड बनाए, अभयारण्यों ने उपयुक्त आवास दिए और सतत निगरानी से मृगों की गतिविधियों को समझने और जोखिमों की पहचान में मदद मिली। इस तरह संरक्षण का काम एकीकृत प्रबंधन प्रणाली में बदल गया।
राष्ट्रीय विशेषज्ञता और पर्यावरणीय स्थिरता
अरब मृग पुनर्स्थापन कार्यक्रम का असर केवल इस प्रजाति तक सीमित नहीं रहा। इससे प्रजनन, संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन, पशु चिकित्सा देखभाल, अनुप्रयुक्त अनुसंधान और तकनीकी क्षमताओं के विकास में राष्ट्रीय विशेषज्ञता बनी, जो सऊदी अरब में जैव विविधता के अधिक टिकाऊ भविष्य की ओर ले जाती है।
