मक्का समझौता: सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के सैन्य सहयोग की कड़ी
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. मोहम्मद अल-हरबी ने कहा कि मक्का समझौता सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच लगातार सैन्य सहयोग का विस्तार है।
मुख्य बिंदु
AIराजनीतिक विश्लेषक डॉ. मोहम्मद अल-हरबी ने कहा कि मक्का समझौता सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच लगातार सैन्य सहयोग का विस्तार है।
अल-हरबी ने 'इख़बारिया रेडियो' से बातचीत में बताया कि यह समझौता अचानक नहीं हुआ है, बल्कि यह दुनिया में आए बदलावों के अनुरूप है। इसकी शुरुआत 2020 में तुर्की के साथ हथियार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, गोला-बारूद और ड्रोन से जुड़ी कई रणनीतिक संधियों के साथ हुई थी। 2025 में सऊदी और पाकिस्तान के बीच बातचीत को और मजबूत किया गया।
राजनीतिक विश्लेषक ने आगे कहा कि इस समझौते के बेहद अहम आयाम हैं, क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर गठबंधनों और समूहों की पुनर्रचना करता है। इन तीनों देशों की सामूहिक शक्ति 26 यूरोपीय देशों के बराबर है और इनकी कुल आबादी लगभग 400 मिलियन है। इसके अलावा, इनके पास महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हैं और ये एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ते हैं।
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो त्रिपक्षीय रक्षा सहयोग की रूपरेखा तैयार करता है। इसके तहत, किसी एक देश पर सशस्त्र हमला सभी पर हमला माना जाएगा। इस पहल का मकसद साझा प्रतिरोध को मजबूत करना और क्षेत्रीय सुरक्षा व स्थिरता को बढ़ावा देना है।
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