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शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 · रियाद
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सऊदी अरब

मस्जिदे नबवी के इमाम ने हरमैन पर हमले को बताया बड़ा अपराध

मस्जिदे नबवी के इमाम शेख अब्दुलमोहसिन अल-कासिम ने शुक्रवार की खुतबा में मक्का और मदीना की पवित्रता और उन पर हमले की गंभीरता पर जोर दिया।

अजेल हिंदी37 मिनट पहले · 3 मिनट का पठन
मस्जिदे नबवी में शुक्रवार की नमाज का दृश्य

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मस्जिदे नबवी के इमाम और खतीब शेख डॉ. अब्दुलमोहसिन अल-कासिम ने आज शुक्रवार की नमाज में अपने खुतबे में अल्लाह की रचनात्मक और नियामक हिकमत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अल्लाह के सभी कार्य उसकी हिकमत और रहमत पर आधारित हैं, और बंदों को मिलने वाली नेमतें या आज़माइशें उसी के फैसले से होती हैं।

शेख कासिम ने बताया कि लोगों के स्वभाव, बुद्धि, रोज़ी और जीवन-स्थितियों में फर्क अल्लाह की हिकमत का हिस्सा है, ताकि लोग एक-दूसरे से लाभान्वित हों और समाज का भला हो। उन्होंने कुरआन की आयत का हवाला दिया: (हमने उनकी आजीविका दुनिया की जिंदगी में बांट दी है...)

उन्होंने आगे कहा कि अल्लाह ही रोज़ी देने वाला और अपनी मखलूक में हिकमत से फैसले करने वाला है। वह अपने इल्म के मुताबिक रोज़ी देता है, और अगर जरूरत से ज्यादा देता तो लोग ज़्यादती और सरकशी करने लगते। उन्होंने कुरआन की आयत का हवाला दिया: (अगर अल्लाह अपने बंदों को खुलकर रोज़ी देता तो वे ज़मीन में सरकशी करने लगते)। उन्होंने कहा कि अल्लाह का हर फैसला, चाहे वह रोकना हो या देना, उसकी गहरी हिकमत के मुताबिक होता है।

शेख ने बताया कि अल्लाह कभी नेमत देकर आज़माता है तो कभी आज़माइश देकर नेमत देता है, ताकि बंदों के दर्जे बुलंद हों और गुनाह माफ हों। गरीबी और अमीरी दोनों आज़माइश के रूप हैं, जिनकी हिकमत इंसान की समझ से बाहर हो सकती है। उन्होंने कहा कि रोज़ी की फराखी अल्लाह की मोहब्बत की निशानी नहीं और गरीबी उसकी नाराज़गी की दलील नहीं, असल फज़ीलत का पैमाना ईमान, तक़वा और नेक अमल है।

फज़ीलत का पैमाना और सब्र-शुक्र की अहमियत

उन्होंने कहा कि पैगंबरों और सहाबा (रजि.) में भी अमीरी-गरीबी का फर्क था, लेकिन धन कभी फज़ीलत का पैमाना नहीं रहा, असल फज़ीलत ईमान, तक़वा और नेक अमल है। उन्होंने कुरआन की आयत का हवाला दिया: (निस्संदेह अल्लाह के यहां सबसे इज़्ज़तदार वही है जो सबसे ज्यादा परहेज़गार है)।

शेख ने बताया कि सब्र और शुक्र दोनों ही मोमिन के लिए जरूरी हैं। अमीर को चाहिए कि नेमत पर शुक्र अदा करे और गरीब को चाहिए कि आज़माइश पर सब्र करे। कभी-कभी दोनों हालात एक ही शख्स की जिंदगी में जमा हो सकते हैं, जैसा कि पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) ने सब्र और शुक्र दोनों में कमाल हासिल किया।

हरमैन शरीफैन की अहमियत और उन पर हमले की चेतावनी

खुतबे के आखिर में, इमाम मस्जिदे नबवी ने मक्का और मदीना की महानता और फज़ीलत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इनकी पवित्रता का सम्मान, सुरक्षा की हिफाजत, संपत्ति, शिक्षा संस्थानों और मस्जिदों की रक्षा हर मुसलमान का फर्ज है।

शेख कासिम ने हरमैन शरीफैन पर हमले और वहां के अमनपसंद लोगों को डराने के खिलाफ सख्त चेतावनी दी। उन्होंने इसे बड़ा अपराध बताया और कहा कि हूती आतंकी मिलिशिया द्वारा इन पवित्र शहरों की सुरक्षा को निशाना बनाना गंभीर अपराध है। उन्होंने 'असहाब-ए-फील' की घटना और पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) की हदीस का हवाला दिया: (जो मदीना के लोगों को जुल्म से डराएगा, अल्लाह उसे डराएगा और उस पर अल्लाह, फरिश्तों और तमाम लोगों की लानत होगी)।

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