तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान का गठबंधन उन्हें व्यापक प्रभाव देता है
राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ फिरास रिदवान ओग्लू ने कहा कि तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच गठबंधन की भौगोलिक स्थिति उन्हें बड़ा प्रभाव देती है।
मुख्य बिंदु
AIराजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ फिरास रिदवान ओग्लू ने कहा कि तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच गठबंधन की भौगोलिक स्थिति उन्हें व्यापक प्रभाव देती है।
ओग्लू ने 'अल अरबिया एफएम' से बातचीत में कहा कि इस गठबंधन का भौगोलिक विस्तार बहुत अहम है, क्योंकि इसमें बड़े क्षेत्रफल और प्रभावशाली देश शामिल हैं। यह समझौता अन्य देशों के लिए भी इस गठबंधन में शामिल होने की संभावना को आसान बनाता है।
उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों पर हमले अब अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने तक पहुँच गए हैं, क्योंकि आर्थिक शक्ति का केंद्र खाड़ी देशों से शुरू होता है। इसी वजह से एक साझा रक्षा गठबंधन की आवश्यकता महसूस हुई।
ओग्लू ने आगे कहा कि सुरक्षा और सैन्य गठबंधन अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देते हैं। तुर्की के लिए भी इस्लामी गठबंधन के तहत 'कब्जे को सीमित करना' फायदेमंद है। इसमें फिलिस्तीन का मुद्दा और उसके लोगों का समर्थन भी एजेंडे में रहेगा। उन्होंने संभावना जताई कि भविष्य में कई और देश इस गठबंधन में शामिल हो सकते हैं।
सऊदी अरब, तुर्की गणराज्य और इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान ने 'मक्का रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता मक्का में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान हुआ, जिसकी मेज़बानी किंग सलमान ने की थी।
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