किंग अब्दुलअज़ीज़ पब्लिक लाइब्रेरी का अनूठा योगदान अनुवाद में
रियाद स्थित किंग अब्दुलअज़ीज़ पब्लिक लाइब्रेरी ने 100 से अधिक किताबों का अनुवाद कर और दुर्लभ संग्रह जुटाकर अनुवाद व सांस्कृतिक संवाद को समृद्ध किया है।
मुख्य बिंदु
AIरियाद की किंग अब्दुलअज़ीज़ पब्लिक लाइब्रेरी अनुवाद के क्षेत्र में अपनी विविध योजनाओं और गतिविधियों के ज़रिए भाषाओं के बीच सांस्कृतिक और ज्ञान-विनिमय को आगे बढ़ा रही है। लाइब्रेरी ने अब तक 100 से अधिक किताबों का अनुवाद किया है, जिनमें सऊदी अरब का इतिहास, अरबी और इस्लामी संस्कृति पर केंद्रित पुस्तकें शामिल हैं। इनमें कई किताबें विश्व की प्रमुख भाषाओं से अरबी में अनूदित हैं। लाइब्रेरी ने अनुवाद के क्षेत्र में अपनी भूमिका को और मज़बूत करते हुए 640 दुर्लभ अनूदित किताबों का संग्रह किया है, जिनमें सबसे पुरानी किताब 19वीं सदी की शुरुआत की है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा हर साल 30 सितंबर को मनाए जाने वाले विश्व अनुवाद दिवस के मौके पर, लाइब्रेरी के दुर्लभ संग्रह की कुछ अहम किताबों पर रोशनी डाली गई है, जो ज्ञान, विज्ञान, कला, साहित्य और सामान्य संस्कृति के क्षेत्र में अनुवाद का महत्व दर्शाती हैं।
दुर्लभ अनुवाद:
लाइब्रेरी की सबसे पुरानी दुर्लभ किताबों में 'अल-रब्त अल-जिराहिया' (सर्जिकल बैंडेज) है, जिसे इब्राहीम अल-नबरावी ने 1834 में अनुवाद किया था। इसमें बैंडेज़ के प्रकार, उनकी तैयारी, उपयोग और विभिन्न तकनीकों पर चर्चा की गई है।
एक अन्य दुर्लभ किताब 'नुख्बत अल-अधकिया फी इल्म अल-किमिया' (रसायन विज्ञान में बुद्धिमानों का चयन) है, जिसे फ्रांसीसी लेखक जस्टिनेल बेक ने लिखा और 1869 में अहमद अफंदी नदा ने अनुवाद किया। इसमें रसायन विज्ञान का इतिहास, रासायनिक प्रक्रियाएं, तत्व, धातुएं, क्रिस्टलीकरण, अम्ल-क्षार, कार्बन, वायु और हीरे जैसे विषयों पर अध्याय हैं।
'अल-असासात अल-निजामिया फी अल-तदाबीर अल-अस्करिया' (सैन्य उपायों की प्रणालीगत नींव) को अहमद रिफअत ने 1869 में अनुवाद किया, जिसमें 19वीं सदी के अंत की सैन्य परंपराओं और आदेशों का विवरण है।
दुर्लभ अनूदित किताबों में 'मतालेअ अल-शमूस फी किस्सत अल-वज़ीर इस्ताकियूस' (मंत्री इस्ताकियूस की कहानी) है, जिसे 1874 में अंतोन एलियास अल-हमवी ने अनुवाद किया। इसमें 18 अध्याय हैं, जो एक परिवार की शहादत तक की कहानी कहते हैं। इसी तरह, 1885 में सामी अफंदी कसीरी ने अलेक्जेंडर ड्यूमा की 'मातिल्दा' का अनुवाद किया। 'अल-तरबिया अल-हदीसा' (आधुनिक शिक्षा) को एडमंड डेमोलिन ने लिखा और 1901 में हसन तौफीक अल-दजवी ने अनुवाद किया, जिसमें आधुनिक शिक्षा के 19 अध्याय हैं, जैसे अच्छा स्वाद, खेल, स्वास्थ्य, पुस्तकालय, देशप्रेम, परिश्रम, संकल्प और सामाजिक जीवन।
इस दुर्लभ संग्रह में 'सर अल-नजाह' (सफलता का रहस्य) — सैम्युअल स्माइल्स, 'उसूल अल-फलसफा अल-इल्मिया वा अल-फलसफा अल-अखलाकिया' — रेने वर्म्स, 'अब्बास द्वितीय' — लॉर्ड क्रोमर, 'तफसील आयात अल-कुरान अल-करिम' — जूल लाबोम, 'तारीख अल-फलासिफा' (1836), 'अल-तशरीह अल-आम' — क्लार्क (1845), 'अल-लालि अल-बहिया फी अल-हंदसा अल-वस्फिया' (1845), 'हसन अल-बराअत फी इल्म अल-ज़िराअत' — विजरी (1866), 'तहज़ीब अल-नुखबा अल-सनिया फी अल-उसूल अल-हंदसिया' — सादिक बेक शनान (1881), 'अल-आफात अल-इज्तिमाइया वा इलाजुहा' — लियो टॉल्स्टॉय, 'अल-रौदा अल-बहिया' — कर्टुआ जेरार (1870), 'मन्हज अल-सवाब फी मबादि अल-आदाब' — बेंजामिन कोमिज (1891), 'हुकूक अल-दुवल' (1894) और स्पिनोज़ा, अल्बेयर कामू, दोस्तोयेव्स्की, मार्सेल प्रूस्त, थॉमस कार्लाइल, जॉन विल्सन, चार्ल्स हैमिल्टन, फागलेरी, लॉरा सटन, बर्ट्रेंड रसेल, हर्बर्ट स्पेंसर, सिमोन द बोवुआर, जॉर्ज डार्सी, बोरिस सोकोलोव, राफ बेरी, इनिस क्लाउड, अल्फ्रेड होइट्ज़ सहित कई अन्य लेखकों की किताबें शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार:
पिछले दस वर्षों में लाइब्रेरी ने अरबी और चीनी भाषाओं के बीच अनुवाद को भी बढ़ावा दिया है, खासकर चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी में अपने शाखा की स्थापना के बाद। यहां अरबी साहित्य, विज्ञान और कहानियों की कई किताबें चीनी में और चीनी किताबें अरबी में अनूदित की गई हैं।
इस क्षेत्र में अपनी भूमिका को और सशक्त करने के लिए लाइब्रेरी ने 2006 में 'किंग अब्दुल्ला बिन अब्दुलअज़ीज़ इंटरनेशनल ट्रांसलेशन अवॉर्ड' की शुरुआत की। अब तक 70 से अधिक देशों के 1726 से अधिक कार्यों ने 45 भाषाओं में इस पुरस्कार के लिए आवेदन किया है। 11 संस्करणों में 516 निर्णायकों ने भाग लिया और 132 अनुवादकों, संस्थाओं व सांस्कृतिक संगठनों को सम्मानित किया गया।
इसके अलावा, लाइब्रेरी के पास अनुवाद पर केंद्रित 30,781 किताबों का संग्रह है, साथ ही हज़ारों किताबें अंग्रेज़ी, फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश, रूसी, पुर्तगाली, चीनी, हिंदी और अन्य भाषाओं से अरबी में अनूदित हैं।
सम्मान और सराहना:
किंग अब्दुलअज़ीज़ पब्लिक लाइब्रेरी को रियाद इंटरनेशनल बुक फेयर 2025 में बच्चों के साहित्य के क्षेत्र में 'श्रेष्ठता' पुरस्कार मिला है। यह सम्मान बच्चों की कहानियों के प्रकाशन और अनुवाद में लाइब्रेरी की पहल और वैश्विक स्तर पर अरबी बाल साहित्य को प्रस्तुत करने के लिए दिया गया है।


