कृत्रिम बुद्धिमत्ता इंसानी सोच का विकल्प नहीं: बीशा यूनिवर्सिटी विशेषज्ञ
बीशा यूनिवर्सिटी की साइबर सुरक्षा प्रभारी ने कहा कि एआई उपकरण इंसानी दिमाग का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक हैं।
मुख्य बिंदु
AIबीशा यूनिवर्सिटी में साइबर सुरक्षा प्रभारी डॉ. मुनीरा अल-दुवैरिज ने 'अल-इखबारिया' चैनल से बातचीत में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विभिन्न उपकरण और तकनीकें इंसानी दिमाग की जगह नहीं ले सकते, बल्कि ये केवल ऐसे सहायक साधन हैं जो समय और मेहनत बचाने में मदद करते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि एआई तकनीकों का इस्तेमाल हमें इन्हें काम और उत्पादन के लिए सहायक के रूप में करना चाहिए, न कि इंसानी सोच के विकल्प के तौर पर।
यह टिप्पणी 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता वर्ष' पहल के तहत आई है, जिसे बीशा यूनिवर्सिटी ने नमाास प्रांत के मम्शा अल-दुबाब पार्क में आयोजित किया है। इसमें वैज्ञानिक सत्र, कार्यशालाएँ, इंटरैक्टिव स्टॉल और तकनीकी अनुभव शामिल हैं, जिनका उद्देश्य एआई की जानकारी फैलाना और इसके अनुप्रयोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
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इस पहल में पूरे दिन चलने वाले कार्यक्रम हैं, जिनमें वैज्ञानिक सत्र, कार्यशालाएँ, इंटरैक्टिव स्टॉल और तकनीकी अनुभव शामिल हैं। यह सब 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता वर्ष' पहल के तहत बीशा यूनिवर्सिटी द्वारा नमाास में आयोजित किया जा रहा है।
