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शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 · रियाद
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सऊदी अरब

यमनी राष्ट्रपति ने बहुराष्ट्रीय समुद्री गठबंधन और सऊदी समर्थन की सराहना की

यमनी राष्ट्रपति रशाद अलअलीमी ने देश के इस अहम दौर में सऊदी नेतृत्व और बहुराष्ट्रीय समुद्री गठबंधन के योगदान को महत्वपूर्ण बताया।

अजेल हिंदी54 मिनट पहले · 2 मिनट का पठन
यमनी राष्ट्रपति अलअलीमी और सऊदी नेतृत्व की बैठक

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यमन के राष्ट्रपति परिषद के प्रमुख डॉ. रशाद मोहम्मद अलअलीमी ने देश के इतिहास के इस निर्णायक दौर की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि यह समय सबसे अधिक जिम्मेदारी की मांग करता है। उन्होंने कहा कि हालिया घटनाक्रम से स्पष्ट है कि हौती मिलिशिया अब भी गैरकानूनी लाभ के लिए तनाव बढ़ाने पर आमादा है और उनके फैसले बाहरी एजेंडों के अधीन होते जा रहे हैं, जिनका यमनी जनता से कोई लेना-देना नहीं है।

राष्ट्रपति अलअलीमी ने सलाह और सुलह समिति के प्रमुख मोहम्मद अलगैथी के साथ बैठक में कहा कि यमनी सरकार का संदेश साफ और सख्त है—वह जबरदस्ती थोपे गए हालात को स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने किंग सलमान और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में सऊदी अरब की भूमिका की सराहना करते हुए कहा, "सऊदी अरब के रुख ने यमनी राज्य संस्थाओं, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, मानवीय संकट को कम करने और यमन व क्षेत्र में सुरक्षा व स्थिरता को मजबूत करने में बुनियादी आधार का काम किया है। यह दोनों देशों और जनता के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है।"

अलअलीमी ने सऊदी नेतृत्व में बहुराष्ट्रीय समुद्री रक्षा गठबंधन की स्थापना की घोषणा को सामूहिक सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता और लाल सागर, अदन की खाड़ी और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य में महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए बेहद अहम कदम बताया।

राष्ट्रपति ने कहा कि सऊदी अरब द्वारा प्रस्तावित यह गठबंधन इस बात की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय समझ को दर्शाता है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा साझा जिम्मेदारी है, जिसमें कोई ढिलाई नहीं हो सकती। इसकी सफलता क्षेत्रीय स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों की रक्षा और दुनिया भर के लोगों के साझा हितों की सुरक्षा में योगदान करेगी।

अलअलीमी ने सभी यमनी ताकतों से इन बदलावों का लाभ उठाने, एकजुटता बढ़ाने और आंतरिक मोर्चे को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई केवल सेना की नहीं, बल्कि पूरी गणराज्य की लड़ाई है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में राजनीतिक दलों और घटकों को अपने पारंपरिक भूमिका में लौटना चाहिए—जागरूकता, लामबंदी और खतरों का सामना करने के लिए समाज को तैयार करना चाहिए, साथ ही राष्ट्रीय राज्य की अवधारणा को फिर से स्थापित करना और मिलिशिया व उनके विध्वंसक एजेंडे को अलग-थलग करना चाहिए।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि आज दलों की जिम्मेदारी है कि वे राज्य संस्थाओं की बहाली की लड़ाई को पूरे समाज का मुद्दा बनाएं, न कि केवल सत्ता का। उन्होंने उम्मीद जताई कि सलाह और सुलह समिति राष्ट्रीय सहमति और व्यापक एकजुटता को मजबूत करने के लिए और अधिक प्रभावी मंच बनेगी।

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