अलउला: संकटग्रस्त गिद्धों की शरणस्थली, संरक्षण के प्रयास जारी
अलउला में गिद्धों की निगरानी और संकटग्रस्त प्रजातियों की सुरक्षा के कार्यक्रम लगातार तेज़ किए जा रहे हैं, विश्व गिद्ध जागरूकता दिवस के मौके पर।
मुख्य बिंदु
AIअलउला प्रांत अपनी विविध भौगोलिक संरचना के कारण कई तरह के गिद्धों और प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक आवास बन गया है। यहां चल रहे निगरानी कार्यक्रमों और क्षेत्रीय अध्ययनों से इन पक्षियों, खासकर संकटग्रस्त प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई है, साथ ही उनकी गतिविधियों और पर्यावरणीय जरूरतों का अध्ययन भी किया गया है।
यह पहल विश्व गिद्ध जागरूकता दिवस के साथ मेल खाती है, जो हर साल सितंबर के पहले शनिवार को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य इन पक्षियों के महत्व, पारिस्थितिक संतुलन में उनकी भूमिका और वैश्विक स्तर पर उन्हें घेरने वाले खतरों को उजागर करना है।
शरआन अभयारण्य में दुर्लभ प्रजातियों की निगरानी
1,500 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले शरआन प्राकृतिक अभयारण्य में गिद्धों की दुर्लभ प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई है। पर्यावरण निगरानी दल ने संकटग्रस्त 'रुपेल गिद्ध' की दुर्लभ उपस्थिति को दर्ज किया, जो अलउला में इस प्रजाति का दूसरा आधिकारिक दस्तावेजीकरण है।
निगरानी के नतीजों के अनुसार, अलउला में नियमित रूप से 20 से 30 'नसर अल-अधून' गिद्ध देखे गए, जो इस प्रजाति की राष्ट्रीय आबादी का लगभग 2.5% है। इसके अलावा, मौजूदा मौसम में क्षेत्र में चार प्रजनन जोड़े भी दर्ज किए गए।
आधुनिक तकनीक और शोध कार्यक्रम
वैज्ञानिक अनुसंधान के तहत, अलउला रॉयल कमीशन ने गिद्धों के अध्ययन में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया है। किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (काओस्ट) के सहयोग से 'नसर अल-अधून' गिद्ध की जीपीएस ट्रैकिंग के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिससे उसकी गतिविधियों, व्यवहार, निवास क्षेत्रों और संभावित खतरों की सटीक जानकारी मिल सके और पर्यावरणीय उपायों को समर्थन मिले।
मैदानी कार्यों में प्रवासी पक्षियों के मार्ग से जुड़े खतरों को कम करना, प्राकृतिक आवासों की पुनर्बहाली और विशेषज्ञ अध्ययन शामिल हैं। यह पूरी व्यवस्था अलउला में जैव विविधता और मूल प्रजातियों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।
पारिस्थितिक संतुलन में गिद्धों की भूमिका
गिद्ध मृत जीवों को हटाकर और पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण कर पारिस्थितिक तंत्र की सेहत में अहम भूमिका निभाते हैं। इनकी उपस्थिति और सफल प्रजनन पर्यावरणीय संतुलन का संकेत है। अलउला में वैज्ञानिक निगरानी और ट्रैकिंग से इन पक्षियों को समझने और उनके संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिल रही है, जिससे वे अपने प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रह सकें।
