इमाम तुर्की बिन अब्दुल्ला संरक्षित क्षेत्र में अत्यधिक चराई पर चेतावनी
इमाम तुर्की बिन अब्दुल्ला संरक्षित क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने अत्यधिक चराई के पर्यावरणीय प्रभावों पर प्रकाश डाला और इसे रोकने के लिए सतत प्रयासों की आवश्यकता बताई।
मुख्य बिंदु
AIइमाम तुर्की बिन अब्दुल्ला संरक्षित क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने अत्यधिक चराई के पर्यावरणीय प्रभावों पर प्रकाश डाला है। प्राधिकरण ने कहा कि इस प्रथा को सीमित करना केवल नियमों का पालन भर नहीं, बल्कि चारागाहों और हरित क्षेत्रों को क्षरण से बचाने और उनकी प्राकृतिक संसाधनों की पुनरुत्पादन क्षमता को बनाए रखने के लिए भी जरूरी है।
प्राधिकरण ने आज जारी अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि अत्यधिक चराई केवल एक पर्यावरणीय उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर चारागाहों और वनस्पति आवरण का क्षरण करता है। इससे पौधों का विकास और बीज उत्पादन पूरा होने से पहले ही उनका उपभोग हो जाता है, जिससे उनकी पुनरुत्पादन क्षमता घटती है। इसका परिणाम धीरे-धीरे वनस्पति आवरण में कमी, चारागाहों के क्षरण और प्राकृतिक आवासों की भोजन व आश्रय देने की क्षमता में गिरावट के रूप में सामने आता है। साथ ही, यह रेत के फैलाव, ऐतिहासिक स्थलों के लिए खतरा और उनके प्राकृतिक परिवेश के क्षरण में भी योगदान देता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चराई का लगातार दबाव मिट्टी को प्रभावित करता है, जिससे उसकी कटाव की प्रवृत्ति बढ़ जाती है और वर्षा जल को संजोने की क्षमता कम हो जाती है। इसके अलावा, यह हरित क्षेत्रों में कमी, मरुस्थलीकरण की गति बढ़ने और रेत के फैलाव में भी भूमिका निभाता है।
प्राधिकरण ने जोर देकर कहा कि चारागाहों की सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है। उसने अत्यधिक चराई से बचने, सतत चराई प्रथाओं का पालन करने और पौधों को बढ़ने व पुनर्जीवित होने के लिए पर्याप्त समय देने की अपील की। साथ ही, यह भी कहा कि आज जो वनस्पति आवरण नष्ट हो रहा है, उसे फिर से स्वस्थ होने में समय लगेगा, और उसकी रक्षा करना प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और संरक्षित क्षेत्र में वन्य जीवन की स्थिरता के लिए जरूरी है।
