मक्का रक्षा समझौता: अमेरिका की बोझ साझा नीति को मजबूती
डॉ. इयाद रिफाई के अनुसार, मक्का रक्षा समझौता अमेरिका की अपने सहयोगियों संग सैन्य भागीदारी और सुरक्षा बोझ साझा करने की नीति को समर्थन देता है।
मुख्य बिंदु
AIराजनीतिक विश्लेषक डॉ. इयाद रिफाई का कहना है कि मक्का रक्षा समझौता अमेरिका की उस नीति को मजबूती देता है, जिसमें वह अपने सहयोगी देशों के साथ सैन्य भागीदारी और सुरक्षा बोझ साझा करना चाहता है।
रिफाई ने 'अल अरबिया' चैनल से बातचीत में बताया कि बीते वर्षों से अमेरिकी रणनीति 'अमेरिका के साथ बोझ साझा' पर आधारित रही है। वाशिंगटन पहले भी नाटो और यूरोपीय संघ के सदस्य देशों से यही मांग करता रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उनकी सरकार और अमेरिका की शासक نخبة मक्का रक्षा समझौते का स्वागत करते हैं। अमेरिका के लिए इस संदर्भ में अहम है कि क्षेत्रीय देश खुद नियंत्रण संभालें, क्योंकि वाशिंगटन अब एशिया में चीन का सामना करने की तैयारी कर रहा है। इसी कारण अमेरिका मध्य पूर्व, यूरोप और अफ्रीका में अपने मित्र देशों के साथ सुरक्षा गठबंधन बनाकर वैश्विक पूंजीवादी आर्थिक मॉडल और मध्य पूर्व में अपनी आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक मौजूदगी की रक्षा करना चाहता है।
राजनीतिक विश्लेषक ने यह भी जोड़ा कि अमेरिका सुरक्षा और सैन्य रूप से चीन और अमेरिकी आंतरिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है; वह पहले की तरह मध्य पूर्व में अपनी उपस्थिति नहीं चाहता, क्योंकि इससे अमेरिकी नीतियां उलझन में पड़ जाती हैं और वाशिंगटन अब 'अमेरिकी पुलिस' की भूमिका लंबे समय तक निभाना नहीं चाहता, क्योंकि अमेरिकी मतदाता भी अब इसका समर्थन नहीं करता।
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