सऊदी अरब में कलीबीन सीज़न शुरू, 13 दिन तेज़ गर्मी और खजूर की पकाई का दौर
सऊदी अरब में कलीबीन सीज़न की शुरुआत हुई, जो 13 दिन चलेगा। यह गर्मी के चरम और कई क्षेत्रों में खजूर के पकने के साथ आता है।
मुख्य बिंदु
AIसऊदी अरब में आज से कलीबीन सीज़न की शुरुआत हो गई है, जो 13 दिन तक चलेगा। यह मौसमीय चक्रों और कृषि पंचांग में एक अहम पड़ाव माना जाता है। पारंपरिक रूप से यह मौसम तारों की निगरानी और उनके आधार पर साल के समय, मौसम के बदलाव और फलों के पकने की पहचान से जुड़ा है।
‘कलीबीन’ दो पास-पास के तारों के नाम पर रखा गया है, जो खगोलीय ‘नथरा’ नक्षत्र के अंतर्गत आते हैं। यह गर्मी के मौसम का एक उन्नत चरण है और ‘सुहैल’ सीज़न से ठीक पहले आता है।
कृषि पंचांग विशेषज्ञ मोहम्मद अल-वदई ने बताया कि कलीबीन सीज़न कृषि चक्र की एक अहम कड़ी है, जो 13 दिन तक तेज़ गर्मी के साथ चलता है। इस दौरान कई फसलें और फल पकते हैं और यह कृषि पंचांग व लोक परंपरा से गहराई से जुड़ा है।
खजूर की पकाई और कृषि गतिविधियों में विविधता
यह समय खजूर और रुतब के पकने के उन्नत चरण के साथ आता है। देश के कई इलाकों में इस दौरान खजूर के पेड़ों पर रंग बदलने, पकने और तोड़ने की प्रक्रिया चलती है, हालांकि किस्मों, स्थानों और जलवायु के अनुसार समय अलग-अलग हो सकता है।
असीर क्षेत्र में इस दौरान कृषि गतिविधियों में विविधता देखी जाती है, क्योंकि वहाँ की ऊँचाई, भू-आकृति और मौसम अलग-अलग हैं। इस समय स्थानीय फसलों जैसे ज्वार, गेहूं, जौ, मक्का के साथ मौसमी फल और सब्ज़ियों की देखभाल का काम भी चलता है।
मौसम और संस्कृति में महत्व
कलीबीन सीज़न का स्थानीय स्मृति में मौसम और कृषि से गहरा संबंध है। पहले किसान तारों और नक्षत्रों को देखकर अपने कृषि कार्यों और फसलों के पकने का समय तय करते थे और मौसम के बदलाव का अनुमान लगाते थे।
अब खगोल और मौसम विज्ञान की तरक्की के साथ आधुनिक उपकरण और मौसम संबंधी आंकड़े मौसम की निगरानी और पूर्वानुमान के लिए मुख्य आधार बन गए हैं, लेकिन पारंपरिक नक्षत्रों और मौसमीय नामों का सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व आज भी कायम है।
गौरतलब है कि कलीबीन सीज़न 23 अगस्त तक चलेगा, जिसके बाद लोक पंचांग के अनुसार ‘सुहैल’ सीज़न शुरू होता है। यह बदलाव ऐतिहासिक रूप से मौसम, फलों के पकने और कृषि कार्यों के चक्र से जुड़ा रहा है।
