सऊदी अरब ने COP16 की ऐतिहासिक अध्यक्षता की उपलब्धियाँ साझा कीं
सऊदी अरब ने COP16 सम्मेलन की अध्यक्षता के दौरान हासिल प्रमुख उपलब्धियाँ साझा कीं और भूमि क्षरण व सूखे से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
मुख्य बिंदु
AIसऊदी अरब ने संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम संधि के 16वें पक्ष सम्मेलन (COP16) की अपनी अध्यक्षता के दौरान हासिल प्रमुख उपलब्धियाँ साझा कीं और भूमि क्षरण व सूखे की चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी अंतरराष्ट्रीय कोशिशें जारी रखने का भरोसा दिलाया। यह जानकारी पर्यावरण, जल और कृषि मंत्रालय में पर्यावरण मामलों के उप सचिव डॉ. ओसामा बिन इब्राहीम फकीहा ने मंगोलिया की राजधानी उलान बातर में COP17 के उद्घाटन के मौके पर आयोजित प्रेस वार्ता में दी।
डॉ. फकीहा ने बताया कि COP16 की सऊदी अध्यक्षता ने वैश्विक पर्यावरण एजेंडे में ऐतिहासिक बदलाव लाया, जिससे भूमि क्षरण और सूखे के मुद्दे अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की अध्यक्षता केवल रियाद में सम्मेलन की मेज़बानी तक सीमित नहीं रही, बल्कि लगभग दो वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलन के निष्कर्षों को लागू करने, सहयोग बढ़ाने और पहलों की निगरानी का नेतृत्व किया, जब तक कि अध्यक्षता मंगोलिया को नहीं सौंप दी गई।
अभूतपूर्व उपलब्धियाँ
पर्यावरण उप सचिव ने बताया कि रियाद में हुए COP16 सम्मेलन में कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ दर्ज की गईं। पहली बार 'ग्रीन ज़ोन' की शुरुआत की गई, और 170 देशों के 1,00,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए, जबकि COP15 में 7,000 और COP14 में 6,000 प्रतिभागी थे। सम्मेलन में 820 से अधिक कार्यक्रम और 100 पवेलियन आयोजित हुए, जिनमें 50 देशों और लगभग 70 क्षेत्रीय, अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय संगठनों ने भाग लिया।
उन्होंने आगे बताया कि सऊदी अरब ने भूमि क्षरण रोकने के लिए 12 अरब डॉलर से अधिक की वित्तीय प्रतिबद्धताएँ जुटाईं। पहली बार चरागाह, पशुपालक समुदायों और कृषि भूमि से जुड़े अहम फैसले लिए गए। इसके अलावा, सूखे पर 24 बिंदुओं वाले एक ऐतिहासिक निर्णय पर सहमति बनी, जो COP17 की वार्ताओं के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
विशेष पहलें और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
डॉ. फकीहा ने बताया कि 2025 और 2026 में भी सऊदी अरब पांच समन्वित मार्गों के ज़रिए सम्मेलन के कार्यों का नेतृत्व करता रहेगा, जिनमें कूटनीतिक उपस्थिति बढ़ाना, रियाद कार्यसूची को लागू करना, अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और वार्ताओं में सक्रिय भागीदारी, और सूखे, जल और खाद्य सुरक्षा के बीच संबंधों को मजबूत करना शामिल है।
प्रमुख पहलों में 'सूखे से निपटने के लिए रियाद वैश्विक साझेदारी' की शुरुआत की गई, जो अपनी तरह की पहली वैश्विक साझेदारी है और इसमें दो अरब डॉलर से अधिक की प्रतिबद्धताएँ जुटाई गईं। साथ ही, सऊदी अरब ने विश्व मौसम विज्ञान संगठन के सहयोग से धूल और रेत के तूफानों के लिए अंतरराष्ट्रीय पूर्व चेतावनी पहल को भी सक्रिय किया।
निजी क्षेत्र की भागीदारी और वैश्विक उपस्थिति
COP16 सम्मेलन में मरुस्थलीकरण विषयक सम्मेलनों के इतिहास में पहली बार निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी भागीदारी दर्ज की गई। 'बिजनेस फॉर अर्थ' फोरम का आयोजन हुआ, जिसमें नीति-निर्माताओं और सीईओ ने हिस्सा लिया। सऊदी अरब ने COP16 की उपलब्धियों को वैश्विक मंचों—जैसे विश्व आर्थिक मंच, म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन, पेरिस का ChangeNOW सम्मेलन, बॉन जलवायु सम्मेलन और संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठकों के साथ-साथ ब्राज़ील में COP30—में भी प्रस्तुत किया।
डॉ. फकीहा ने कहा कि मंगोलिया को अध्यक्षता सौंपना केवल नेतृत्व का हस्तांतरण है, प्रयासों का अंत नहीं। सऊदी अरब COP16 के निष्कर्षों के क्रियान्वयन, अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और COP17 की अध्यक्षता को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।
COP17 सम्मेलन में सऊदी अरब कई स्तरों पर भाग ले रहा है, जिनमें वार्ताओं में हिस्सा लेना, आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित करना, 'मिडिल ईस्ट ग्रीन इनिशिएटिव' की उपलब्धियाँ उजागर करना और 'ब्लू ज़ोन' में अपने पवेलियन के ज़रिए 40 से अधिक साइड इवेंट्स का आयोजन शामिल है, जिसमें 22 स्थानीय संस्थाएँ भाग ले रही हैं। यह सऊदी अरब की पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों की स्थिरता के प्रति अग्रणी भूमिका को दर्शाता है।
