राजनीतिक विश्लेषक: मक्का रक्षा समझौता आक्रामक नहीं, रक्षात्मक है
राजनीतिक विश्लेषक बशार जर्रार ने कहा कि मक्का रक्षा समझौता नाटो की धारा 5 के समान है, यानी यह एक रक्षात्मक, न कि आक्रामक, संधि है।
मुख्य बिंदु
AIराजनीतिक विश्लेषक बशार जर्रार ने कहा कि मक्का रक्षा समझौता नाटो चार्टर की धारा 5 के बराबर है, यानी यह एक रक्षात्मक समझौता है, आक्रामक नहीं।
उन्होंने 'अल अरबिया' चैनल से बातचीत में कहा कि अमेरिका की ओर से मक्का समझौते का स्वागत, दोनों देशों के आठ दशकों की साझेदारी और रियाद की अहमियत व उसकी विशिष्ट रक्षा साझेदारी को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषक ने आगे कहा कि यह समझौता पूरी तरह रक्षात्मक प्रतिक्रिया है, इसमें कोई आक्रामकता नहीं है। इसे दो साल से क्षेत्रीय देशों को मिल रही धमकियों के मद्देनज़र तैयार किया गया है। समझौते का मकसद नए मध्य पूर्व और सहयोगियों के साथ नए रिश्तों पर केंद्रित है।
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो इन देशों में से किसी एक पर हमले की स्थिति में सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करेगा। इसका उद्देश्य किसी भी आक्रामक कार्रवाई के खिलाफ संयुक्त प्रतिरोध को बढ़ाना है। समझौते के तहत, इन तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला सभी पर हमला माना जाएगा। साथ ही, यह समझौता तीनों देशों के बीच हर तरह के रक्षा सहयोग को बढ़ाने की बात करता है।
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