सऊदी की NAM वर्षगांठ में भागीदारी शांति और संवाद की पुष्टि
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अब्दुल मजीद जलाल ने कहा कि सऊदी अरब की NAM की 65वीं वर्षगांठ में भागीदारी उसके शांति और संवाद के समर्थन को दर्शाती है।
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राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अब्दुल मजीद जलाल ने कहा कि सऊदी अरब की 65वीं वर्षगांठ पर गुट निरपेक्ष आंदोलन (NAM) में भागीदारी, उसके बुनियादी सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इनमें बल प्रयोग का विरोध, देशों की संप्रभुता और स्वतंत्र निर्णय का सम्मान, तनाव कम करने और शांति फैलाने का समर्थन शामिल है।
जलाल ने चैनल 'अल-इखबारिया' से कहा कि इस मौके पर सऊदी की उपस्थिति उसके इन सिद्धांतों के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है, खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनौतियाँ बढ़ रही हैं और संवाद, शांतिपूर्ण समाधान और स्थिरता के समर्थन की अहमियत और बढ़ गई है।
विदेश राज्य मंत्री इंजीनियर वलीद बिन अब्दुलकरीम अल-खुरीजी ने क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान की ओर से सर्बिया में गुट निरपेक्ष आंदोलन के पहले सम्मेलन की 65वीं वर्षगांठ पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में भाग लिया।
खुरीजी ने कहा कि सऊदी अरब ने गुट निरपेक्ष आंदोलन की स्थापना में योगदान के बाद से उसके स्थायी सिद्धांतों, खासकर देशों की संप्रभुता, स्वतंत्र निर्णय और विवादों के समाधान के लिए बल प्रयोग के विरोध को बनाए रखा है।
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उन्होंने बताया कि यह सऊदी की विदेश नीति में भी झलकता है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के समाधान के लिए संवाद को अपनाया गया है, सहयोग संबंधों का विस्तार किया गया है और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को मजबूत करने वाले रास्तों का समर्थन किया गया है।
विदेश राज्य मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र और गुट निरपेक्ष आंदोलन के माध्यम से समन्वय जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि राजनीतिक और शांतिपूर्ण समाधानों को प्राथमिकता मिले और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन मजबूत हो, जिसमें अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता की सुरक्षा भी शामिल है, जिस पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 में बल दिया गया है।
खुरीजी ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक समाधान की अनुपस्थिति मध्य पूर्व में साफ दिखती है, खासकर ग़ज़ा पट्टी और अन्य फिलिस्तीनी क्षेत्रों में इज़राइली कब्ज़े की लगातार अपराधों और सीरिया की ज़मीन पर हमलों के कारण, जो लोगों के अधिकारों और देशों की संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन है और क्षेत्र को और अधिक तनाव व अस्थिरता की ओर ले जाता है।
उन्होंने दोहराया कि सऊदी अरब का मानना है कि शांति ही क्षेत्र के सभी देशों और लोगों के लिए स्थायी सुरक्षा का एकमात्र रास्ता है, और इस लक्ष्य को पाने के लिए फिलिस्तीनी मुद्दे का न्यायसंगत, व्यापक और अंतिम समाधान शीघ्रता से जरूरी है।
