विशेष कक्षाएँ: छात्रों की ज़रूरत या स्कूल का विकल्प?
अम अल-कुरा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मोहम्मद अल-थुबैती ने कहा कि ट्यूशन क्लासेज़ छात्रों की ज़रूरत के समय सामने आती हैं, लेकिन वे स्कूल की भूमिका का विकल्प भी बन सकती हैं।
मुख्य बिंदु
AIअम अल-कुरा विश्वविद्यालय में प्रबंधन और योजना के प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद अल-थुबैती ने ट्यूशन क्लासेज़ को लेकर जरूरी सावधानियों की ओर ध्यान दिलाया।
डॉ. अल-थुबैती ने "इख़बारिया रेडियो" पर बातचीत में कहा कि ट्यूशन क्लासेज़ तब ज़रूरी हो जाती हैं जब छात्र पढ़ाई में पिछड़ जाता है, लेकिन ये स्कूल और परिवार की भूमिका का विकल्प भी बन सकती हैं, जिससे जिम्मेदारियों के बंटवारे में समस्या आती है।
उन्होंने आगे कहा कि ट्यूशन क्लासेज़ आमतौर पर एक तय समय के लिए होती हैं और तब ज़रूरत पड़ती हैं जब छात्र अपने सहपाठियों के साथ नहीं चल पाता या किसी शिक्षक के प्रदर्शन में कमी आ जाती है, ऐसे में परिवार विकल्प तलाशता है।
डॉ. अल-थुबैती ने यह भी जोड़ा कि जब परिवार और स्कूल अपनी-अपनी जिम्मेदारियाँ निभाना छोड़ देते हैं, तब ट्यूशन क्लासेज़ विकल्प बन जाती हैं। जबकि परिवार और स्कूल दोनों की भूमिकाएँ एक-दूसरे के पूरक हैं, और इनकी साझेदारी में कमी ही ट्यूशन क्लासेज़ की ज़रूरत को बढ़ाती है।
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