मदीना का बئر अरीस: पैगंबर की अंगूठी गिरने और खलीफाओं को जन्नत की बशारत से जुड़ा ऐतिहासिक कुआं
मदीना के क़ुबा क्षेत्र में स्थित बئر अरीस, पैगंबर की अंगूठी गिरने और खलीफाओं को जन्नत की बशारत मिलने की ऐतिहासिक घटना से जुड़ा है।
मुख्य बिंदु
AIऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, मदीना के क़ुबा क्षेत्र में स्थित बئر अरीस वही कुआं है जहां पैगंबर मोहम्मद की अंगूठी गिर गई थी। इसके बाद इसे बئر अल-ख़ातिम (अंगूठी का कुआं) के नाम से भी जाना जाने लगा।
सऊदी अरब की विश्वकोश के मुताबिक, बئر अरीस मदीना में पैगंबर की जीवनी से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध और ऐतिहासिक कुओं में से एक है, जिसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है।
सहीह बुखारी में दर्ज एक रिवायत के अनुसार, पैगंबर मोहम्मद इस कुएं के पास बैठे थे और उन्होंने अबू बक्र, उमर और उस्मान को अंदर आने की अनुमति दी थी और उन्हें जन्नत की बशारत दी थी। इसी वजह से इस कुएं को इस्लामी इतिहास में खास दर्जा मिला।
बताया जाता है कि पैगंबर की अंगूठी आधिकारिक पत्रों पर मुहर लगाने के लिए इस्तेमाल होती थी। यह चांदी की बनी थी और उस पर 'मोहम्मद रसूल अल्लाह' खुदा था। पैगंबर की वफात के बाद यह अंगूठी अबू बक्र, फिर उमर और फिर उस्मान के पास आई। लगभग 30 हिजरी में उस्मान के हाथ से यह कुएं में गिर गई। कई दिनों तक खोजबीन के बावजूद अंगूठी नहीं मिली, और यह घटना मदीना के इतिहास की सबसे प्रसिद्ध घटनाओं में शामिल हो गई।
