बाहा में 50 पुरानी पेड़ों की पहचान, वनस्पति संरक्षण को बढ़ावा
राष्ट्रीय वनस्पति संरक्षण केंद्र ने बहा क्षेत्र में 50 पुरानी पेड़ों का दस्तावेजीकरण किया है, जिससे जैव विविधता की रक्षा और उसकी स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य बिंदु
AIबाहा क्षेत्र में वनस्पति कवर की गणना और दस्तावेजीकरण के प्रयास जारी हैं, जिसमें खासतौर पर पुराने पेड़ों और क्षेत्र की विविध भौगोलिक प्रकृति से जुड़ी वनस्पति प्रजातियों पर ध्यान दिया जा रहा है। यह पहल जैव विविधता की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा व स्थिरता के लिए एक मजबूत सूचना आधार तैयार करने के उद्देश्य से की जा रही है।
इसी क्रम में, राष्ट्रीय वनस्पति संरक्षण और मरुस्थलीकरण रोकथाम केंद्र ने बहा में पहले चरण में 50 पुराने पेड़ों की पहचान की है और उन पर उनकी पर्यावरणीय महत्ता को दर्शाने वाली सूचनात्मक पट्टिकाएँ लगाई हैं।
केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक, मोहम्मद बिन सईद क़दवा ने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान कुछ दुर्लभ और विलुप्ति के कगार पर पहुँची वनस्पति प्रजातियाँ भी सामने आई हैं, जिससे इनकी गणना, दस्तावेजीकरण और निगरानी जारी रखने की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है ताकि इन प्रजातियों और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा की जा सके।
पुरानी पेड़ों की सुरक्षा के लिए भविष्य की योजनाएँ
क़दवा ने आगे बताया कि केंद्र की भविष्य की योजनाओं में इन पुराने पेड़ों का फोटोग्राफिक दस्तावेजीकरण बढ़ाना, उनकी सांस्कृतिक और पर्यावरणीय जानकारी एकत्र करना और उनकी आयु का आकलन करना शामिल है, ताकि उनकी विशेषताओं, प्रसार और महत्ता से जुड़ी व्यापक जानकारी उपलब्ध कराई जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि ये प्रयास बहा क्षेत्र के पुराने पेड़ों के लिए एक समग्र डाटाबेस तैयार करने, उनके संरक्षण कार्यक्रमों को समर्थन देने, उनकी पर्यावरणीय और सांस्कृतिक महत्ता को दर्ज करने और क्षेत्र की अनूठी वनस्पति विविधता के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद करेंगे।
बाहा के पुराने पेड़ स्थानीय पर्यावरण का अभिन्न हिस्सा हैं और इसकी समृद्धि के साक्षी भी हैं। इनका दस्तावेजीकरण और स्थिति की निगरानी ऐसे महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराती है, जो इनकी सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के लिए इनके संरक्षण में सहायक होंगे।
