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सऊदी अरब

खाड़ी देशों की सुरक्षा अविभाज्य: बिदवी

खाड़ी सहयोग परिषद के महासचिव जासिम मोहम्मद अल-बिदवी ने कहा कि परिषद के सदस्य देशों की सुरक्षा एकजुट और अविभाज्य है, और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान जरूरी है।

अजेल हिंदी56 मिनट पहले · 4 मिनट का पठन
GCC महासचिव बिदवी क्षेत्रीय सुरक्षा सम्मेलन में

मुख्य बिंदु

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खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के महासचिव जासिम मोहम्मद अल-बिदवी ने कहा है कि परिषद के सदस्य देशों की सुरक्षा अविभाज्य है। उन्होंने कहा कि एक स्थिर और टिकाऊ क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का पालन, देशों की संप्रभुता का सम्मान, साझा रक्षा को मजबूत करना, कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देना, समुद्री मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा तथा विकास और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को बढ़ावा देना जरूरी है।

यह बयान उन्होंने आज बहरीन की राजधानी मनामा में आयोजित 22वीं क्षेत्रीय सुरक्षा शिखर बैठक 'मनामा डायलॉग 2026' के तहत 'क्षेत्रीय सुरक्षा के आधार' विषयक तीसरे सत्र में भागीदारी के दौरान दिया।

बिदवी ने बताया कि 28 फरवरी के बाद से क्षेत्र में हुई घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ईरान द्वारा परिषद देशों और उनकी नागरिक व महत्वपूर्ण सुविधाओं पर हमलों के बावजूद, इन देशों ने युद्ध में भाग नहीं लिया और तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन बाधित होने से ऊर्जा कीमतें, शिपिंग और बीमा लागत तथा आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हुई हैं।

उन्होंने जुलाई से सऊदी अरब पर हौथी मिलिशिया द्वारा किए जा रहे आतंकी हमलों की निंदा की, जो मक्का और मदीना तक फैल गए हैं। बिदवी ने कहा कि ये हमले इस्लामी पवित्र स्थलों का उल्लंघन हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।

महासचिव ने कहा कि टिकाऊ क्षेत्रीय सुरक्षा पांच मुख्य स्तंभों पर आधारित है। पहला, अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों की संप्रभुता का सम्मान, अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांतों का पालन, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 11 मार्च 2026 के प्रस्ताव 2817 का हवाला दिया, जिसे बहरीन ने परिषद और जॉर्डन की ओर से पेश किया था और 136 देशों ने समर्थन दिया। बिदवी ने इस प्रस्ताव के क्रियान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया।

दूसरा स्तंभ सामूहिक रक्षा और खाड़ी देशों के सैन्य एकीकरण से जुड़ा है। उन्होंने परिषद देशों की सशस्त्र सेनाओं की तत्परता की सराहना की और बताया कि जेद्दा में अप्रैल में हुई 19वीं परामर्श बैठक में नेताओं ने सैन्य एकीकरण बढ़ाने और बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए त्वरित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को पूरा करने का निर्देश दिया।

तीसरा स्तंभ कूटनीति और शांतिपूर्ण तरीकों से विवादों के समाधान पर केंद्रित है। बिदवी ने परिषद देशों के अमेरिका, यूरोप, चीन, भारत और एशियाई देशों के साथ संबंधों और ईरान समेत पड़ोसी देशों से संवाद का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक प्रयासों की सफलता के लिए सभी पक्षों की जिम्मेदार भागीदारी जरूरी है।

चौथा स्तंभ समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा है, जिसे उन्होंने वैश्विक जिम्मेदारी बताया। बिदवी ने कहा कि होर्मुज और बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य में नौवहन बाधित होना वैश्विक आर्थिक हितों के लिए खतरा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हमलों को रोकने, जिम्मेदारों को सजा दिलाने और नौवहन को सामान्य करने की अपील की। परिषद देश तेल-गैस पाइपलाइन, रणनीतिक भंडारण, बिजली-पानी कनेक्टिविटी और खाड़ी रेलवे जैसी परियोजनाओं से ऊर्जा आपूर्ति की मजबूती पर काम कर रहे हैं।

पांचवां स्तंभ विकास और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए स्थिरता हासिल करना है। उन्होंने बताया कि परिषद देशों की अर्थव्यवस्था करीब 2.4 ट्रिलियन डॉलर है, जिससे वे संकटों का सामना करने और क्षेत्रीय-वैश्विक स्थिरता को समर्थन देने में सक्षम हैं।

महासचिव ने यमन में वैध सरकार को समर्थन और स्वीकृत संदर्भों के अनुसार राजनीतिक समाधान की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही इराक, सीरिया और लेबनान की सुरक्षा और स्थिरता के समर्थन की बात कही। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान के आधार पर फिलिस्तीनी मुद्दे का न्यायपूर्ण समाधान जरूरी है, साथ ही जल और खाद्य सुरक्षा तथा जलवायु चुनौतियों का सामना भी अहम है।

बिदवी ने अंत में कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा केवल शक्ति संतुलन पर नहीं, बल्कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित होनी चाहिए जिन्हें सभी पक्ष मानें, और सुरक्षा व्यवस्था में क्षेत्रीय देशों की भागीदारी हो। उन्होंने 2024 में शुरू की गई परिषद की क्षेत्रीय सुरक्षा दृष्टि के तहत इस व्यवस्था के निर्माण में योगदान के लिए परिषद देशों की तत्परता जताई।

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