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गुरुवार, 15 अक्तूबर 2026 · रियाद
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सऊदी अरब

सुल्तान बिन सलमान: चिकित्सा और तकनीक में सऊदी अरब वैश्विक स्तर पर अग्रणी

प्रिंस सुल्तान बिन सलमान ने कहा कि सऊदी अरब चिकित्सा और आधुनिक तकनीक में दुनिया के साथ कदमताल कर रहा है और विकलांगता अनुसंधान का भविष्य उज्ज्वल है।

अजेल हिंदी49 मिनट पहले · 2 मिनट का पठन
प्रिंस सुल्तान बिन सलमान सम्मेलन में भाषण देते हुए

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प्रिंस सुल्तान बिन सलमान, जो किंग सलमान के विशेष सलाहकार, किंग सलमान विकलांगता अनुसंधान केंद्र के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के अध्यक्ष और सातवें अंतरराष्ट्रीय विकलांगता एवं पुनर्वास सम्मेलन के अध्यक्ष हैं, ने कहा कि विकलांगता अनुसंधान का भविष्य 'उज्ज्वल' है और इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर बहुत बड़ी संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा कि आज सऊदी अरब 'दुनिया के केंद्र में है, कोई अलग-थलग देश नहीं'।

सम्मेलन के दौरान 'अजेल' से बातचीत में उन्होंने कहा, 'आज सऊदी अरब की सभी संस्थाएँ, खासकर विजन 2030 के बाद, चिकित्सा और आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में विकलांगता से निपटने के लिए भविष्य की दिशा में काम कर रही हैं। हम सभी इसी राह पर हैं और उम्मीद है कि भविष्य में अच्छे परिणाम मिलेंगे।'

तीन दिन चले इस सम्मेलन में दुनिया भर के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इसमें विकलांगता और पुनर्वास अनुसंधान के नए आयामों, उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल और ऐसे समाधानों पर चर्चा हुई, जो विकलांग व्यक्तियों की स्वतंत्रता और जीवन की गुणवत्ता बढ़ाएँ। वैज्ञानिक कार्यक्रम में स्वास्थ्य, पुनर्वास, मानसिक और शैक्षिक विषयों के साथ-साथ जीनोमिक अनुसंधान, सहायक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और समावेशी पहुंच पर भी फोकस रहा।

सम्मेलन में किंग सलमान ग्लोबल विकलांगता रिसर्च अवॉर्ड के विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिसमें 111 देशों से 770 नामांकन आए थे। इसके अलावा, विकलांग व्यक्तियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हैकाथॉन में 918 टीमों के 2250 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिन्होंने चुनौतियों के समाधान के लिए नवाचारी विचार प्रस्तुत किए।

सम्मेलन के सातवें संस्करण का समापन इस बात के साथ हुआ कि अब समय है कि सऊदी अरब केवल वैज्ञानिक प्रगति का अनुसरण न करे, बल्कि उसमें सक्रिय योगदान भी दे। इसके लिए अनुसंधान और नवाचार के रास्ते बढ़ाने और वैज्ञानिक साझेदारियाँ मजबूत करने की जरूरत है, जिससे सऊदी अरब विकलांगता अनुसंधान के भविष्य में अहम भूमिका निभा सके।

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