नज़ाहा की नई नियमावली: आपत्ति, शिकायत और जांच के स्पष्ट दिशा-निर्देश
वकील डॉ. सालेह अल-हार्थी ने नज़ाहा की नई नियमावली को अहम बताया, जो आपत्ति, शिकायत और जांच की प्रक्रियाएँ स्पष्ट करती है।
मुख्य बिंदु
AIवकील डॉ. सालेह अल-हार्थी ने भ्रष्टाचार नियंत्रण और निगरानी प्राधिकरण 'नज़ाहा' की नई नियमावली की अहमियत पर ज़ोर दिया।
अल-हार्थी ने 'अल-इख़बारिया' चैनल से बातचीत में कहा कि यह नियमावली आपत्ति और शिकायत की प्रक्रियाओं के साथ-साथ जांच और हिरासत के नियमों को स्पष्ट करती है। साथ ही, इसमें अनुशासनात्मक कार्रवाई और चेतावनी की व्यवस्था भी है, जिससे न्याय और सुशासन को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने बताया कि नियमावली की पांचवीं धारा के तहत, किसी भी पक्ष द्वारा जांचकर्ता को हटाने के अनुरोध को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार संबंधित इकाई या शाखा के प्रमुख को है। इसी तरह, मकानों की तलाशी का आदेश भी प्रमुख द्वारा दिया जा सकता है।
अल-हार्थी ने आगे कहा कि पहले यह अधिकार केवल लोक अभियोजन के पास था, लेकिन अब नज़ाहा को भी यह अधिकार मिल गया है। अनुशासन के मामले में, इकाई या शाखा प्रमुख को अपने अधीनस्थ सदस्यों को मौखिक या लिखित चेतावनी देने का अधिकार है। इसके लिए एक समिति बनती है, जिसमें प्रमुख और कम से कम जांच एवं अभियोजन इकाई के उपप्रमुख स्तर का एक सदस्य शामिल होता है।
गौरतलब है कि नज़ाहा की नई कार्यकारी नियमावली का उद्देश्य भ्रष्टाचार के मामलों में जांच और अभियोजन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और जांचकर्ताओं, अभियोजकों तथा इकाई प्रमुखों की कार्यकारी शक्तियों को स्पष्ट करना है।
नज़ाहा लगातार सार्वजनिक धन की हानि, पद के दुरुपयोग या निजी लाभ के लिए सरकारी पद का इस्तेमाल करने वालों की निगरानी और कार्रवाई करती है। यह जिम्मेदारी व्यक्ति के पद छोड़ने के बाद भी बनी रहती है, क्योंकि वित्तीय और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के अपराध समय के साथ समाप्त नहीं होते। नज़ाहा कानून के तहत दोषियों पर सख्ती से कार्रवाई करती है।
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