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रविवार, 16 अगस्त 2026 · रियाद
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सऊदी अरब

सऊदी और यमनी विदेश मंत्रियों की साझेदारी व सुरक्षा पर चर्चा

सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान और यमनी विदेश मंत्री अफराह अल-जुबा ने द्विपक्षीय संबंध, साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर बातचीत की।

अजेल हिंदी1 घंटे पहले · 3 मिनट का पठन
सऊदी और यमनी विदेश मंत्री बैठक के दौरान

मुख्य बिंदु

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सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान ने यमन की विदेश मंत्री और प्रवासी मामलों की मंत्री अफराह अल-जुबा के साथ दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, रणनीतिक साझेदारी और उसे मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। साथ ही, यमन और क्षेत्र की ताज़ा स्थिति और साझा हित के मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

यमनी समाचार एजेंसी 'सबाअ' के अनुसार, यह बैठक सऊदी विदेश मंत्रालय में हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच भाईचारे, पड़ोस और साझा हितों के आधार पर सहयोग बढ़ाने और क्षेत्र की स्थिरता व विकास के लिए साझेदारी के नए क्षेत्रों को तलाशने पर जोर दिया गया।

विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान ने यमन के राष्ट्रपति परिषद, सरकार और जनता के प्रति सऊदी अरब के अडिग समर्थन को दोहराया और यमन की सुरक्षा, स्थिरता, एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए हरसंभव समर्थन का आश्वासन दिया।

यमनी विदेश मंत्री ने यमन की सरकार और जनता की ओर से सऊदी अरब के स्थायी और भाईचारे भरे रुख के लिए आभार जताया। उन्होंने राजनीतिक, आर्थिक, मानवीय और विकासात्मक क्षेत्रों में सऊदी भूमिका की सराहना की, जिससे यमनी संस्थाओं की मजबूती, मानवीय संकट में राहत और आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा मिला।

बैठक में अफराह अल-जुबा ने सऊदी अरब द्वारा यमनी प्रवासियों को दी जा रही सुविधाओं और देखभाल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ये प्रवासी यमनी अर्थव्यवस्था के लिए अहम हैं और लाखों परिवारों के लिए जीवनरेखा हैं, खासकर ऐसे समय में जब हूती मिलिशिया ने देशभर में आम लोगों पर गंभीर आर्थिक और सामाजिक दबाव डाला है।

दोनों पक्षों ने मंत्रालयों के बीच संस्थागत सहयोग बढ़ाने, सऊदी कूटनीतिक अनुभवों से यमनी राजनयिकों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के उपायों पर भी चर्चा की, जिससे दोनों देशों के बीच समन्वय और प्रदर्शन में सुधार हो सके।

बैठक में हूती मिलिशिया की हालिया गतिविधियों और उनके यमन, सऊदी अरब और पूरे क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभावों, लाल सागर और बाब अल-मंदब की सुरक्षा तथा अंतरराष्ट्रीय नौवहन और व्यापार के लिए उत्पन्न खतरों और उनसे निपटने के उपायों पर भी चर्चा हुई।

यमनी विदेश मंत्री ने सऊदी अरब की जमीन और उसकी नागरिक व आर्थिक संस्थाओं पर हूती मिलिशिया के हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि ये हमले न केवल सऊदी अरब की सुरक्षा बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता और वहां के लोगों की खुशहाली के लिए खतरा हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यमन अपनी जमीन या समुद्री मार्गों को सऊदी अरब, पड़ोसी देशों या अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए खतरे के अड्डे के रूप में इस्तेमाल नहीं होने देगा। यमन का भौगोलिक स्थान और समुद्री मार्ग क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अहम हैं और ये वैश्विक व्यापार के लिए सेतु हैं, न कि किसी के लिए धमकी या दबाव का साधन।

यमनी मंत्री ने यह भी कहा कि हूती मिलिशिया द्वारा यमनी सरकारी संस्थाओं, नागरिक प्रतिष्ठानों और खासकर अल-मोखा बंदरगाह पर हमले, यमनी जनता के हितों पर सीधा हमला हैं और इससे युद्ध का दायरा बढ़ाने और बाब अल-मंदब के पास एक अहम बंदरगाह को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि यमनी शहरों, बंदरगाहों और लाल सागर में नौवहन की सुरक्षा आपस में जुड़ी हुई है और इनकी रक्षा के लिए एक मजबूत राज्य की आवश्यकता है।

डॉ. अल-जुबा ने सऊदी अरब की विदेश नीति, उसके नेतृत्वकारी भूमिका और क्षेत्रीय स्थिरता व साझा खतरों से निपटने के लिए साझेदारी व गठजोड़ बनाने की उसकी दूरदर्शिता की सराहना की। उन्होंने मक्का रक्षा समझौते और बहुराष्ट्रीय समुद्री रक्षा गठबंधन का स्वागत किया, जिन्हें क्षेत्रीय सुरक्षा और साझा प्रतिरोध के लिए अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों की सफलता यमनी राज्य को समर्थन और उसकी समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने से और बढ़ेगी, जिससे यमन क्षेत्रीय सुरक्षा और नौवहन में एक प्रभावी साझेदार बन सकेगा।

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