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रविवार, 18 अक्तूबर 2026 · रियाद
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सऊदी अरब

खाड़ी देशों के लिए रूस से संबंध मजबूत करना प्राथमिकता: बदीवी

खाड़ी सहयोग परिषद के महासचिव जासिम मोहम्मद अल-बदीवी ने कहा कि परिषद के देश रूस के साथ संबंधों को मजबूत करने को विशेष महत्व देते हैं।

अजेल हिंदी54 मिनट पहले · 5 मिनट का पठन
खाड़ी परिषद और रूस के मंत्री स्तरीय संवाद का दृश्य

मुख्य बिंदु

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खाड़ी सहयोग परिषद के महासचिव जासिम मोहम्मद अल-बदीवी ने कहा है कि परिषद के देश रूस के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने को विशेष प्राथमिकता देते हैं। यह रुख साझा हितों और दोनों पक्षों के बीच सहयोग व समन्वय को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की पारस्परिक इच्छा पर आधारित है, जिससे खाड़ी-रूस साझेदारी के नए द्वार खुलेंगे।

यह बात रविवार को बहरीन की राजधानी मनामा में खाड़ी सहयोग परिषद और रूस के बीच नौवें संयुक्त मंत्री स्तरीय रणनीतिक संवाद के दौरान कही गई। बैठक की अध्यक्षता बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल-ज़यानी ने की, जिसमें खाड़ी देशों के विदेश मंत्री और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी शामिल हुए।

महासचिव ने अपने संबोधन में कहा कि यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब क्षेत्र बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। खाड़ी देश अभूतपूर्व हमलों का सामना कर रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा और संप्रभुता प्रभावित हो रही है। समुद्री यातायात और ऊर्जा आपूर्ति पर भी सीधा खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में खाड़ी परिषद और रूस के बीच रणनीतिक संवाद और परामर्श की अहमियत और बढ़ जाती है, ताकि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग बढ़े, सुरक्षा और स्थिरता कायम हो और विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीकों से हो सके। उन्होंने कहा कि 28 फरवरी 2026 से ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर सात हजार से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए गए, जिनमें हवाई अड्डे, बंदरगाह, बिजली और पानी संयंत्र, तेल-गैस प्रतिष्ठान निशाना बने और निर्दोष नागरिकों की जान गई। इन हमलों में खाड़ी देश युद्ध का पक्ष नहीं थे, बल्कि उन्होंने क्षेत्र को इसके दुष्प्रभावों से बचाने की पूरी कोशिश की, बावजूद इसके उनकी संप्रभुता का उल्लंघन हुआ। ईरानी हमलों के अलावा, यमनी हूती मिलिशिया ने भी हमले तेज किए, खासकर सऊदी अरब के नागरिक प्रतिष्ठानों और ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया। इनमें 10 अक्टूबर को रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुआ हमला शामिल है, जिसमें 12 लोगों की मौत और 300 से अधिक घायल हुए। यह अंतरराष्ट्रीय और मानवाधिकार कानून का खुला उल्लंघन है।

इसी संदर्भ में महासचिव ने सऊदी अरब के साथ परिषद की एकजुटता, पूर्ण समर्थन और उसकी सुरक्षा, संप्रभुता तथा नागरिकों की रक्षा के लिए उठाए गए सभी कदमों का समर्थन दोहराया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सऊदी अरब की सुरक्षा को निशाना बनाने वाले हमलों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने और क्षेत्रीय शांति व सुरक्षा के लिए खतरे की निंदा करने की अपील की, खासकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2722 के तहत।

बदीवी ने कहा कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन बाधित करना, जहां से दुनिया की कुल तेल खपत का पांचवां हिस्सा गुजरता है, और पारगमन अधिकारों पर पाबंदी व शुल्क लगाने की कोशिश, साथ ही उसके सहयोगियों द्वारा बाब अल-मंदब और लाल सागर में नौवहन को खतरे में डालना, अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है और वैश्विक ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा व आपूर्ति शृंखलाओं के लिए खतरा है।

परिषद ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन को 28 फरवरी 2026 से पहले की स्थिति में लौटाने और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) के पूर्ण क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की गई है और इन हमलों को तत्काल रोकने की मांग की गई है।

इसी मुद्दे पर बदीवी ने उम्मीद जताई कि रूस, जो सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है, ईरान को प्रस्ताव 2817 (2026) का पालन करने, हमले रोकने, नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान करने और खाड़ी देशों के साथ अच्छे पड़ोसी संबंधों व संप्रभुता के सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित गंभीर संवाद के लिए प्रेरित करेगा।

बदीवी ने कहा कि फिलिस्तीनी मुद्दा परिषद की प्राथमिकता में है। उन्होंने फिलिस्तीनी जनता के वैध अधिकारों, स्वतंत्र राज्य की स्थापना (4 जून 1967 की सीमाओं के भीतर, पूर्वी यरुशलम राजधानी के साथ) के लिए परिषद के अडिग समर्थन को दोहराया, जो अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों और अरब शांति पहल के अनुरूप है।

महासचिव ने रूस के फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के समर्थन और 1988 से उसकी मान्यता की सराहना की। उन्होंने गाजा में युद्धविराम, इजरायली सेना की पूर्ण वापसी, मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति, पुनर्निर्माण और गाजा- पश्चिमी तट के एकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, जबरन विस्थापन या यरुशलम की कानूनी-ऐतिहासिक स्थिति बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध और फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एजेंसी (UNRWA) के कामकाज के समर्थन की बात कही।

सीरियाई मसले पर परिषद ने सीरिया की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन और वहां की सुरक्षा, स्थिरता, विकास और समृद्धि के लिए प्रयासों की अहमियत दोहराई, ताकि क्षेत्र में स्थिरता कायम हो सके।

रूस-यूक्रेन संकट पर बदीवी ने कहा कि परिषद संवाद और कूटनीति के जरिए संकट के शांतिपूर्ण, राजनीतिक समाधान के प्रयासों का समर्थन करती है, ताकि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने कहा कि परिषद को गर्व है कि उसके सदस्य देशों ने मानवीय संकट कम करने में अहम भूमिका निभाई है — जैसे, संयुक्त अरब अमीरात की मध्यस्थता से हजारों कैदियों की अदला-बदली, सऊदी अरब द्वारा जेद्दा और रियाद में वार्ता की मेज़बानी, और कतर की पहल से सौ से अधिक बच्चों की घर वापसी। ये प्रयास परिषद के शांतिपूर्ण समाधान और विश्वास निर्माण की नीति को दर्शाते हैं।

महासचिव ने खाड़ी-रूस संयुक्त कार्ययोजना (2023-2028) के तहत राजनीतिक, व्यापारिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, कृषि, स्वास्थ्य और ऊर्जा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की उम्मीद जताई। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के विशेषज्ञों की मास्को में एक तकनीकी बैठक होनी थी, लेकिन क्षेत्रीय हालात के कारण यह संभव नहीं हो सका। जल्द ही इसका पुनः समन्वय किया जाएगा।

अंत में, बदीवी ने उम्मीद जताई कि खाड़ी परिषद और रूस के बीच नौवां संयुक्त मंत्री स्तरीय रणनीतिक संवाद राजनीतिक और सुरक्षा सलाह-मशविरे को गहरा करने, सहयोग बढ़ाने और क्षेत्र व दुनिया में शांति, सुरक्षा और विकास को आगे बढ़ाने का अवसर बनेगा।​

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