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सऊदी अरब

सऊदी अरब की मानवता में नेतृत्वकारी भूमिका पर डॉ. रबीआ का ज़ोर

डॉ. अब्दुल्ला अल-रबीआ ने सऊदी अरब की मानवता में अग्रणी भूमिका और अंतरराष्ट्रीय कानून व नागरिकों की सुरक्षा में मानवीय कूटनीति के महत्व को रेखांकित किया।

अजेल हिंदी55 मिनट पहले · 3 मिनट का पठन
डॉ. अब्दुल्ला रबीआ संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम में

मुख्य बिंदु

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डॉ. अब्दुल्ला बिन अब्दुलअज़ीज़ अल-रबीआ, जो रॉयल कोर्ट के सलाहकार और किंग सलमान राहत एवं मानवीय कार्य केंद्र के प्रमुख हैं, ने आज न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के मौके पर "मानवीय कूटनीति जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून की रक्षा करती है" विषयक उच्चस्तरीय साइड इवेंट में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम का आयोजन यूरोपीय संघ, अफ्रीकी संघ, आयरलैंड, ब्राज़ील और जॉर्डन ने किया था, जिसमें बेल्जियम की रानी माटिल्डे भी मौजूद रहीं।

अपने संबोधन में डॉ. रबीआ ने कहा कि इस सत्र में तात्कालिक मानवीय चुनौतियों पर चर्चा हुई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवीय कूटनीति की सामूहिक, प्रभावी प्रतिक्रिया तैयार करने में अहम भूमिका को रेखांकित किया, खासकर मध्य पूर्व और अफ्रीका में।

उन्होंने बताया कि सऊदी अरब ने मानवीय और विकास कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाई है। देश ने अब तक 175 देशों में 9,000 से अधिक परियोजनाओं के लिए 145 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की सहायता दी है, जिनका मुख्य फोकस संकटग्रस्त समुदायों पर रहा है।

मानवीय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का महत्व

डॉ. रबीआ ने कहा कि मानवीय कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और सिद्धांत आधारित मानवीय कार्यों की सुरक्षा की बुनियाद है। यह तनाव को बढ़ने से रोकने, संवाद को बढ़ावा देने और मानवीय सहायता की सुरक्षित, सतत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करती है। साथ ही, यह सहायता के दुरुपयोग को रोकने और उसे ऐसे कार्यों में न लगने देने में अहम है, जिससे तनाव या संघर्ष और बढ़े।

उन्होंने ज़ोर दिया कि मानवीय कूटनीति समन्वित, निष्पक्ष और ईमानदार होनी चाहिए। डॉ. रबीआ ने नागरिकों की सुरक्षा, सहायता की निर्बाध आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के बुनियादी दायित्वों के सम्मान और नागरिकों व नागरिक ढांचे पर हमलों की रोकथाम के लिए साझा प्रयासों की अपील की।

मानवीय कार्यों में किंग सलमान राहत केंद्र की भूमिका

डॉ. रबीआ ने बताया कि किंग सलमान राहत केंद्र संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय संगठनों और निजी क्षेत्र के साथ रणनीतिक साझेदारियाँ बनाकर नवाचार और मानवीय परिणामों में सुधार के लिए काम कर रहा है। केंद्र ने 34 देशों में 112 स्थानीय संगठनों के साथ 586 परियोजनाओं में 779 मिलियन डॉलर से अधिक की लागत से सहयोग किया है और 262 पंजीकृत साझेदारों के साथ स्थानीय समुदायों की क्षमता बढ़ाई है।

उन्होंने कहा कि मजबूत साझेदारियाँ और समन्वित कार्यक्रम क्रियान्वयन स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाते हैं और प्रमाण-आधारित, टिकाऊ प्रतिक्रियाएँ संभव बनाते हैं। डॉ. रबीआ ने रणनीतिक योजना और जमीनी कार्यों के बीच तालमेल की ज़रूरत पर बल दिया, ताकि स्थायी और मापनीय प्रभाव सुनिश्चित हो सके।

नागरिकों की सुरक्षा और नई चुनौतियों से निपटने की अपील

डॉ. रबीआ ने संघर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग के खतरों की ओर ध्यान दिलाया और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून में संशोधन की आवश्यकता जताई। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की "मानवीय स्थिति को पुनर्स्थापित करने" की पहल की सराहना की और कहा कि सुधारों को जवाबदेही, पारदर्शिता, समावेशिता और स्थानीय भागीदारों की भूमिका को सशक्त करने पर आधारित होना चाहिए।

अपने संबोधन के अंत में डॉ. रबीआ ने कहा कि मानवीय कूटनीति सिद्धांतों और व्यवहार के बीच सेतु है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून की रक्षा और नागरिकों की सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है, जिसके लिए सतत संवाद, प्रभावी साझेदारियाँ और ठोस कार्रवाई जरूरी है।

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