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सऊदी अरब

मीडिया का भविष्य सिर्फ तकनीक से नहीं, नेतृत्व की भूमिका अहम: वलीद बिन हज़ीम

वलीद बिन हज़ीम ने कहा कि मीडिया क्षेत्र में श्रेष्ठता अब केवल तकनीक पर निर्भर नहीं है, बल्कि नेतृत्व, प्रबंधन और रचनात्मकता की गुणवत्ता में फर्क बढ़ता जा रहा है।

अजेल हिंदी1 घंटे पहले · 3 मिनट का पठन
वलीद बिन हज़ीम मीडिया नेतृत्व पर बोलते हुए

मुख्य बिंदु

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वलीद बिन हज़ीम ने कहा है कि मीडिया क्षेत्र में श्रेष्ठता अब केवल तकनीक के बल पर संभव नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेज़ी से बढ़ते इस्तेमाल और उपकरणों व मंचों की क्षमताओं के एक जैसे होते जाने के बीच, उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी साधन सभी के लिए उपलब्ध हो सकते हैं, लेकिन असली फर्क इनके इस्तेमाल, प्रबंधन और रचनात्मकता की गुणवत्ता में ही रहेगा।

उन्होंने यह बातें अपने लेख 'मीडिया उपकरणों के विकास के साथ... नेतृत्व कौन विकसित करेगा?' में साझा कीं, जिसमें उन्होंने हाल ही में 'मीडिया लीडर्स ट्रैक' कार्यक्रम में अपनी भागीदारी का ज़िक्र किया। यह कार्यक्रम लंदन बिजनेस स्कूल और इनसीआद के बीच आयोजित हुआ था, जिसे उन्होंने एक विशिष्ट मंच बताया, जहां मीडिया नेतृत्व से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।

जटिल परिवेश में नेतृत्व

बिन हज़ीम ने बताया कि कार्यक्रम के अहम विषयों में जटिल और बदलते परिवेश में नेतृत्व शामिल था। आज का मीडिया परिदृश्य एक आपस में जुड़ी व्यवस्था है, जिसमें मंच, दर्शक, तकनीक, नियम, निवेश और कंटेंट सब जुड़े हैं। ऐसे में केवल घटनाओं को पढ़ना काफी नहीं, बल्कि उनके पीछे के पैटर्न और कारणों को समझना और फैसलों के आधारभूत अनुमानों की समीक्षा करना भी ज़रूरी है।

‘बेहतर’ नहीं, ‘अलग’ होना ज़रूरी

लेख के मुताबिक, कार्यक्रम में यह विचार भी सामने आया कि रणनीति सिर्फ बेहतर बनने की नहीं, बल्कि अलग पहचान बनाने की होनी चाहिए। आज जो चीज़ विशेषता है, वह तकनीक के तेज़ विकास और ज्ञान के प्रसार के साथ कल आम हो सकती है। ऐसे में नेतृत्व की भूमिका सिर्फ मौजूदा हालात को संभालने की नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं को तलाशने और उसके लिए तैयार रहने की है।

विचारों का छोटे स्तर पर परीक्षण

उन्होंने कहा कि अनिश्चितता वाले माहौल में हमेशा तैयार जवाब नहीं होते। ऐसे में किसी विचार को छोटे स्तर पर आज़माना, उसका अवलोकन करना और उससे सीखना — यह बड़े फैसले लेने से ज़्यादा मूल्यवान हो सकता है। उन्होंने ज़ोर दिया कि प्रयोग का मकसद अपनी बात सही साबित करना नहीं, बल्कि हकीकत से सीखना होना चाहिए।

अनुभव के पहलुओं का समन्वय

उन्होंने बताया कि लंदन बिजनेस स्कूल और इनसीआद के बीच अनुभव के पहलुओं में समन्वय रहा। इसमें दबाव में नेतृत्व, सख्ती और लचीलापन के बीच संतुलन, विचार-विमर्श और मतभेद की अनुमति देने वाला माहौल बनाना, साथ ही प्रणालीगत सोच, अनुमानों को चुनौती देना और घटनाओं के पार देखना शामिल था। ये सभी बातें नेतृत्व को वर्तमान से भविष्य की ओर देखने और बदलावों व अवसरों के लिए तैयार रहने की सोच को मजबूत करती हैं।

उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि यह अनुभव बताता है कि मीडिया का भविष्य केवल तकनीक से नहीं बनेगा। जैसे-जैसे उपकरणों की क्षमताएं एक जैसी होती जाएंगी, नेतृत्व, निर्णय की गुणवत्ता, संदर्भ की समझ और भविष्य की दिशा पहचानने की योग्यता की अहमियत बढ़ती जाएगी।

आभार और सराहना

बिन हज़ीम ने सूचना मंत्री सलमान अल-दोसरी को मीडिया नेतृत्व के विकास में उनके समर्थन और रुचि के लिए धन्यवाद दिया। उप मंत्री डॉ. अब्दुल्ला मग्लूथ को कार्यक्रम की निगरानी और मार्गदर्शन के लिए, और सऊदी मीडिया अकादमी को इस विशिष्ट अनुभव के लिए सराहना दी। उन्होंने कार्यक्रम में भाग लेने वाले मीडिया नेताओं का भी आभार जताया और कहा कि उनकी विविध विशेषज्ञता और विचार-विमर्श ने अनुभव को और समृद्ध किया।

अंत में उन्होंने कहा कि उपकरणों का विकास जारी रहेगा, लेकिन असली प्रभाव उन पर निर्भर करेगा जो उन्हें सही दिशा में ले जा सकते हैं और उनके ज़रिए मूल्य पैदा कर सकते हैं।

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